इस्लाम
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99. अज़-ज़लज़ला

1जब धरती को पूरी तरह झंझोड़ दिया जायेगा।

2तथा भूमि अपने बोझ बाहर निकाल देगी।

3और इन्सान कहेगा कि इसे क्या हो गया

4उस दिन वह अपनी सभी सूचनायें वर्णन कर देगी।

5क्योंकि तेरे पालनहार ने उसे यही आदेश दिया है।

6उस दिन लोग तितर-बितर होकर आयेंगे, ताकि वे अपने कर्मों को देख लें।

7तो जिसने एक कण के बराबर भी पुण्य किया होगा, उसे देख लेगा।

8और जिसने एक कण के बराबर भी बुरा किया होगा, उसे देख लेगा।

स्रोत: Maulana Azizul Haque Al Umari

WEBREATH · 11:11

«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं