इस्लाम
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93. विज्ञापन-दुहा

1शपथ है दिन चढ़े की

2और शपथ है रात्रि की, जब उसका सन्नाटा छा जाये

3(हे नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और ने ही विमुख हुआ।

4और निश्चय ही आगामी युग तेरे लिए प्रथम युग से उत्तम है।

5और तेरा पालनहार तुझे इतना देगा कि तू प्रसन्न हो जायेगा।

6क्या उसने तुझे अनाथ पाकर शरण नहीं दी

7और तुझे पथ भूला हुआ पाया, तो सीधा मार्ग नहीं दिखाया

8और निर्धन पाया, तो धनी नहीं कर दिया

9तो तुम अनाथ पर क्रोध न करना।

10और माँगने वाले को न झिड़कना।

11और अपने पालनहार के उपकार का वर्णन करना।

स्रोत: Maulana Azizul Haque Al Umari

WEBREATH · 11:11

«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं