92. अल-लैल
1रात्रि की शपथ, जब छा जाये
2तथा दिन की शपथ, जब उजाला हो जाये
3और उसकी शपथ जिसने नर और मदा पैदा किये
4वास्तव में, तुम्हारे प्रयास अलग-अलग हैं।
5फिर जिसने दान दिया और भक्ति का मार्ग अपनाया
6और भली बात की पूष्टि करता रहा
7तो हम उसके लिए सरलता पैदा कर देंगे।
8परन्तु, जिसने कंजूसी की और ध्यान नहीं दिया
9और भली बात को झुठला दिया।
10तो हम उसके लिए कठिनाई को प्राप्त करना सरल कर देंगे।
11और जब वह गढ़े में गिरेगा, तो उसका धन उसके काम नहीं आयेगा।
12हमारा कर्तव्य इतना ही है कि हम सीधा मार्ग दिखा दें।
13जबकि आलोक-परलोक हमारे ही हाथ में है।
14मैंने तुम्हें भड़कती आग से सावधान कर दिया है।
15जिसमें केवल बड़ा हत्भागा ही जायेगा।
16जिसने झुठला दिया तथा (सत्य से) मुँह फेर लिया।
17परन्तु, संयमी (सदाचारी) उससे बचा लिया जायेगा।
18जो अपना धन, दान करता है, ताकि पवित्र हो जाये।
19उसपर किसी का कोई उपकार नहीं, जिसे उतारा जा रहा है।
20वह तो केवल अपने परम पालनहार की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए है।
21निःसंदेह, वह प्रसन्न हो जायेगा।
WEBREATH · 11:11
«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं