इस्लाम
वापस

91. ऐश-शम्स

1सूर्य तथा उसकी धूप की शपथ है

2और चाँद की शपथ, जब उसके पीछे निकले

3और दिन की शपथ, जब उसे (अर्थात सूर्य को) प्रकट कर दे

4और रात्रि की सौगन्ध, जब उसे (सूर्य को) छुपा ले

5और आकाश की सौगन्ध तथा उसकी जिसने उसे बनाया

6तथा धरती की सौगन्ध और जिसने उसे फैलाया

7और जीव की सौगन्ध, तथा उसकी जिसने उसे ठीक ठीक सुधारा।

8फिर उसे दुराचार तथा सदाचार का विवेक दिया है।

9वह सफल हो गया, जिसने अपने जीव का शुध्दिकरण किया।

10तथा वह क्षति में पड़ गया, जिसने उसे (पाप में) धंसा दिया।

11समूद" जाति ने अपने दुराचार के कारण (ईशदूत) को झुठलाया।

12जब उनमें से एक हत्भागा तैयार हुआ।

13(ईशदूत सालेह ने) उनसे कहा कि अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी की रक्षा करो।

14किन्तु, उन्होंने नहीं माना और उसे वध कर दिया, जिसके कारण उनके पालनहार ने यातना भेज दी और उन्हें चौरस कर दिया।

15और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।

स्रोत: Maulana Azizul Haque Al Umari

WEBREATH · 11:11

«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं