88. अल-ग़ाशिया
1क्या तेरे पास पूरी सृष्टी पर छा जाने वाली (क्यामत) का समाचार आया
2उस दिन कितने मूँह सहमे होंगे।
3परिश्रम करते थके जा रहे होंगे।
4पर वे दहकती आग में जायेंगे।
5उन्हें खोलते सोते का जल पिलाया जायेगा।
6उनके लिए कटीली झाड़ के सिवा, कोई भोजन सामग्री नहीं होगी।
7जो न मोटा करेगी और न भूख दूर करेगी।
8कितने मुख उस दिन निर्मल होंगे।
9अपने प्रयास से प्रसन्न होंगे।
10ऊँचे स्वर्ग में होंगे।
11उसमें कोई बकवास नहीं सुनेंगे।
12उसमें बहता जल स्रोत होगा।
13और उसमें ऊँचे-ऊँचे सिंहासन होंगे।
14उसमें बहुत सारे प्याले रखे होंगे।
15पंक्तियों में गलीचे लगे होंगे।
16और मख़्मली क़ालीनें बिछी होंगी।
17क्या वह ऊँटों को नहीं देखते कि कैसे पैदा किये गये हैं
18और आकाश को कि किस प्रकार ऊँचा किया गया
19और पर्वतों को कि कैसे गाड़े गये
20तथा धरती को कि कैसे पसारी गयी
21अतः आप शिक्षा (नसीह़त) दें कि आप शिक्षा देने वाले हैं।
22आप उनपर अधिकारी नहीं हैं।
23परन्तु, जो मुँह फेरेगा और नहीं मानेगा
24तो अल्लाह उसे भारी यातना देगा।
25उन्हें हमारी ओर ही वापस आना है।
26फिर हमें ही उनका ह़िसाब लेना है।
WEBREATH · 11:11
«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं