इस्लाम
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113. अल-फ़लाक़

1(हे नबी!) कहो कि मैं भोर के पालनहार की शरण लेता हूँ।

2हर उसकी बुराई से, जिसे उसने पैदा किया।

3तथा रात्रि की बुराई से, जब उसका अंधेरा छा जाये।

4तथा गाँठ लगाकर उनमें फूँकने वालियों की बुराई से।

5तथा द्वेष करने वाले की बुराई से, जब वह द्वेष करे।

स्रोत: Maulana Azizul Haque Al Umari

WEBREATH · 11:11

«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं