104. अल-हुमाज़ा
1विनाश हो उस व्यक्ति का, जो कचोके लगाता रहता है और चौटे करता रहता है।
2जिसने धन एकत्र किया और उसे गिन-गिन कर रखा।
3क्या वह समझता है कि उसका धन उसे संसार में सदा रखेगा
4कदापि ऐसा नहीं होगा। वह अवश्य ही 'ह़ुतमा' में फेंका जायेगा।
5और तुम क्या जानो कि 'ह़ुतमा' क्या है
6वह अल्लाह की भड़काई हुई अग्नि है।
7जो दिलों तक जा पहूँचेगी।
8वह, उसमें बन्द कर दिये जायेंगे।
9लँबे-लँबे स्तंभों में।
WEBREATH · 11:11
«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं