इस्लाम
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101. अल-क़ारिया

1वह खड़खड़ा देने वाली।

2क्या है वह खड़ख़ा देने वाली

3और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है

4जिस दिन लोग, बिखरे पतिंगों के समान (व्याकूल) होंगे।

5और पर्वत, धुनी हुई ऊन के समान उडेंगे।

6तो जिसके पलड़े भारी हुए

7तो वह मनचाहे सुख में होगा।

8तथा जिसके पलड़ हल्के हुए

9तो उसका स्थान 'हाविया' है।

10और तुम क्या जानो कि वह (हाविया) क्या है

11वह दहक्ती आग है।

स्रोत: Maulana Azizul Haque Al Umari

WEBREATH · 11:11

«यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा» — क़ुरआन 14:7

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं