عیسائیت
واپس

सफ़नियाह 2

1ऐ बेहया क़ौम, जमा होकर हाज़िरी के लिए खड़ी हो जा,

2इससे पहले कि मुक़र्ररा दिन आकर तुझे भूसे की तरह उड़ा ले जाए। ऐसा न हो कि तुम रब के सख़्त ग़ुस्से का निशाना बन जाओ, कि रब का ग़ज़बनाक दिन तुम पर नाज़िल हो जाए।

3ऐ मुल्क के तमाम फ़रोतनो, ऐ उसके अहकाम पर अमल करनेवालो, रब को तलाश करो! रास्तबाज़ी के तालिब हो, हलीमी ढूँडो। शायद तुम उस दिन रब के ग़ज़ब से बच जाओ।

4ग़ज़्ज़ा को छोड़ दिया जाएगा, अस्क़लून वीरानो-सुनसान हो जाएगा। दोपहर के वक़्त ही अशदूद के बाशिंदों को निकाला जाएगा, अक़रून को जड़ से उखाड़ा जाएगा।

5क्रेते से आई हुई क़ौम पर अफ़सोस जो साहिली इलाक़े में रहती है। क्योंकि रब तुम्हारे बारे में फ़रमाता है, “ऐ फ़िलिस्तियों की सरज़मीन, ऐ मुल्के-कनान, मैं तुझे तबाह करूँगा, एक भी बाक़ी नहीं रहेगा।”

6तब यह साहिली इलाक़ा चराने के लिए इस्तेमाल होगा, और चरवाहे उसमें अपनी भेड़-बकरियों के लिए बाड़े बना लेंगे।

7मुल्क यहूदाह के घराने के बचे हुओं के क़ब्ज़े में आएगा, और वही वहाँ चरेंगे, वही शाम के वक़्त अस्क़लून के घरों में आराम करेंगे। क्योंकि रब उनका ख़ुदा उनकी देख-भाल करेगा, वही उन्हें बहाल करेगा।

8“मैंने मोआबियों की लान-तान और अम्मोनियों की इहानत पर ग़ौर किया है। उन्होंने मेरी क़ौम की रुसवाई और उसके मुल्क के ख़िलाफ़ बड़ी बड़ी बातें की हैं।”

9इसलिए रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “मेरी हयात की क़सम, मोआब और अम्मोन के इलाक़े सदूम और अमूरा की मानिंद बन जाएंगे। उनमें ख़ुदरौ पौदे और नमक के गढ़े ही पाए जाएंगे, और वह अबद तक वीरानो-सुनसान रहेंगे। तब मेरी क़ौम का बचा हुआ हिस्सा उन्हें लूटकर उनकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लेगा।”

10यही उनके तकब्बुर का अज्र होगा। क्योंकि उन्होंने रब्बुल-अफ़वाज की क़ौम को लान-तान करके क़ौम के ख़िलाफ़ बड़ी बड़ी बातें की हैं।

11जब रब मुल्क के तमाम देवताओं को तबाह करेगा तो उनके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। तमाम साहिली इलाक़ों की अक़वाम उसके सामने झुक जाएँगी, हर एक अपने अपने मक़ाम पर उसे सिजदा करेगा।

12रब फ़रमाता है, “ऐ एथोपिया के बाशिंदो, मेरी तलवार तुम्हें भी मार डालेगी।”

13वह अपना हाथ शिमाल की तरफ़ भी बढ़ाकर असूर को तबाह करेगा। नीनवा वीरानो-सुनसान होकर रेगिस्तान जैसा ख़ुश्क हो जाएगा।

14शहर के बीच में रेवड़ और दीगर कई क़िस्म के जानवर आराम करेंगे। दश्ती उल्लू और ख़ारपुश्त उसके टूटे-फूटे सतूनों में बसेरा करेंगे, और जंगली जानवरों की चीख़ें खिड़कियों में से गूँजेंगी। घरों की दहलीज़ें मलबे के ढेरों में छुपी रहेंगी जबकि उनकी देवदार की लकड़ी हर गुज़रनेवाले को दिखाई देगी।

15यही उस ख़ुशबाश शहर का अंजाम होगा जो पहले इतनी हिफ़ाज़त से बसता था और जो दिल में कहता था, “मैं ही हूँ, मेरे सिवा कोई और है ही नहीं।” आइंदा वह रेगिस्तान होगा, ऐसी जगह जहाँ जानवर ही आराम करेंगे। हर मुसाफ़िर “तौबा तौबा” कहकर वहाँ से गुज़रेगा।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath