عیسائیت
واپس

सफ़नियाह 1

1ज़ैल में रब का वह कलाम क़लमबंद है जो सफ़नियाह बिन कूशी बिन जिदलियाह बिन अमरियाह बिन हिज़क़ियाह पर नाज़िल हुआ। उस वक़्त यूसियाह बिन अमून यहूदाह का बादशाह था।

2रब फ़रमाता है, “मैं रूए-ज़मीन पर से सब कुछ मिटा डालूँगा,

3इनसानो-हैवान, परिंदों, मछलियों, ठोकर खिलानेवाली चीज़ों और बेदीनों को। तब ज़मीन पर इनसान का नामो-निशान तक नहीं रहेगा।” यह रब का फ़रमान है।

4“यहूदाह और यरूशलम के तमाम बाशिंदों पर मेरी सज़ा नाज़िल होगी। बाल देवता की जितनी भी बुतपरस्ती अब तक रह गई है उसे नेस्तो-नाबूद कर दूँगा। न बुतपरस्त पुजारियों का नामो-निशान रहेगा,

5न उनका जो छतों पर सूरज, चाँद बल्कि आसमान के पूरे लशकर को सिजदा करते हैं, जो रब की क़सम खाने के साथ साथ मिलकूम देवता की भी क़सम खाते हैं।

6जो रब की पैरवी छोड़कर न उसे तलाश करते, न उस की मरज़ी दरियाफ़्त करते हैं वह सबके सब तबाह हो जाएंगे।

7अब रब क़ादिरे-मुतलक़ के सामने ख़ामोश हो जाओ, क्योंकि रब का दिन क़रीब ही है। रब ने इसके लिए ज़बह की क़ुरबानी तैयार करके अपने मेहमानों को मख़सूसो-मुक़द्दस कर दिया है।”

8रब फ़रमाता है, “जिस दिन मैं यह क़ुरबानी चढ़ाऊँगा उस दिन बुज़ुर्गों, शहज़ादों और अजनबी लिबास पहननेवालों को सज़ा दूँगा।

9उस दिन मैं उन पर सज़ा नाज़िल करूँगा जो तवह्हुमपरस्ती के बाइस दहलीज़ पर क़दम रखने से गुरेज़ करते हैं, जो अपने मालिक के घर को ज़ुल्म और फ़रेब से भर देते हैं।”

10रब फ़रमाता है, “उस दिन मछली के दरवाज़े से ज़ोर की चीख़ें, नए शहर से आहो-ज़ारी और पहाड़ियों से कड़कती आवाज़ें सुनाई देंगी।

11ऐ मकतीस मुहल्ले के बाशिंदो, वावैला करो, क्योंकि तुम्हारे तमाम ताजिर हलाक हो जाएंगे। वहाँ के जितने भी सौदागर चाँदी तोलते हैं वह नेस्तो-नाबूद हो जाएंगे।

12तब मैं चराग़ लेकर यरूशलम के कोने कोने में उनका खोज लगाऊँगा जो इस वक़्त बड़े आराम से बैठे हैं, ख़ाह हालात कितने बुरे क्यों न हों। मैं उनसे निपट लूँगा जो सोचते हैं, ‘रब कुछ नहीं करेगा, न अच्छा काम और न बुरा।’

13ऐसे लोगों का माल लूट लिया जाएगा, उनके घर मिसमार हो जाएंगे। वह नए मकान तामीर तो करेंगे लेकिन उनमें रहेंगे नहीं, अंगूर के बाग़ लगाएँगे लेकिन उनकी मै पिएँगे नहीं।”

14रब का अज़ीम दिन क़रीब ही है, वह बड़ी तेज़ी से हम पर नाज़िल हो रहा है। सुनो! वह दिन तलख़ होगा। हालात ऐसे होंगे कि बहादुर फ़ौजी भी चीख़कर मदद के लिए पुकारेंगे।

15रब का पूरा ग़ज़ब नाज़िल होगा, और लोग परेशानी और मुसीबत में मुब्तला रहेंगे। हर तरफ़ तबाहीओ-बरबादी, हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा, हर तरफ़ घने बादल छाए रहेंगे।

16उस दिन दुश्मन नरसिंगा फूँककर और जंग के नारे लगाकर क़िलाबंद शहरों और बुर्जों पर टूट पड़ेगा।

17रब फ़रमाता है, “चूँकि लोगों ने मेरा गुनाह किया है इसलिए मैं उनको बड़ी मुसीबत में उलझा दूँगा। वह अंधों की तरह टटोल टटोलकर इधर-उधर फिरेंगे, उनका ख़ून ख़ाक की तरह गिराया जाएगा और उनकी नाशें गोबर की तरह ज़मीन पर फेंकी जाएँगी।”

18जब रब का ग़ज़ब नाज़िल होगा तो न उनका सोना, न चाँदी उन्हें बचा सकेगी। उस की ग़ैरत पूरे मुल्क को आग की तरह भस्म कर देगी। वह मुल्क के तमाम बाशिंदों को हलाक करेगा, हाँ उनका अंजाम हौलनाक होगा।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath