عیسائیت
واپس

ग़ज़लुल-ग़ज़लात 7

1ऐ रईस की बेटी, जूतों में चलने का तेरा अंदाज़ कितना मनमोहन है! तेरी ख़ुशवज़ा रानें माहिर कारीगर के ज़ेवरात की मानिंद हैं।

2तेरी नाफ़ प्याला है जो मै से कभी नहीं महरूम रहती। तेरा जिस्म गंदुम का ढेर है जिसका इहाता सोसन के फूलों से किया गया है।

3तेरी छातियाँ ग़ज़ाल के जुड़वाँ बच्चों की मानिंद हैं।

4तेरी गरदन हाथीदाँत का मीनार, तेरी आँखें हसबोन शहर के तालाब हैं, वह जो बत-रब्बीम के दरवाज़े के पास हैं। तेरी नाक मीनारे-लुबनान की मानिंद है जिसका मुँह दमिश्क़ की तरफ़ है।

5तेरा सर कोहे-करमिल की मानिंद है, तेरे खुले बाल अरग़वान की तरह क़ीमती और दिलकश हैं। बादशाह तेरी ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीरों में जकड़ा रहता है।

6ऐ ख़ुशियों से लबरेज़ मुहब्बत, तू कितनी हसीन है, कितनी दिलरुबा!

7तेरा क़दो-क़ामत खजूर के दरख़्त सा, तेरी छातियाँ अंगूर के गुच्छों जैसी हैं।

8मैं बोला, “मैं खजूर के दरख़्त पर चढ़कर उसके फूलदार गुच्छों पर हाथ लगाऊँगा।” तेरी छातियाँ अंगूर के गुच्छों की मानिंद हों, तेरे साँस की ख़ुशबू सेबों की ख़ुशबू जैसी हो।

9तेरा मुँह बेहतरीन मै हो, ऐसी मै जो सीधी मेरे महबूब के मुँह में जाकर नरमी से होंटों और दाँतों में से गुज़र जाए।

10मैं अपने महबूब की ही हूँ, और वह मुझे चाहता है।

11आ, मेरे महबूब, हम शहर से निकलकर देहात में रात गुज़ारें।

12आ, हम सुबह-सवेरे अंगूर के बाग़ों में जाकर मालूम करें कि क्या बेलों से कोंपलें निकल आई हैं और फूल लगे हैं, कि क्या अनार के दरख़्त खिल रहे हैं। वहाँ मैं तुझ पर अपनी मुहब्बत का इज़हार करूँगी।

13मर्दुमगयाह की ख़ुशबू फैल रही, और हमारे दरवाज़े पर हर क़िस्म का लज़ीज़ फल है, नई फ़सल का भी और गुज़री का भी। क्योंकि मैंने यह चीज़ें तेरे लिए, अपने महबूब के लिए महफ़ूज़ रखी हैं।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath