ईसाई धर्म
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श्रेष्ठगीत 7

1हे कुलीन की पुत्री, तेरे पाँव जूतियों में क्या ही सुन्दर हैं! तेरी जाँघों की गोलाई ऐसे गहनों के समान है, जिसको किसी निपुण कारीगर ने रचा हो।

2तेरी नाभि गोल कटोरा है, जो मसाला मिले हुए दाखमधु से पूर्ण हो। तेरा पेट गेहूँ के ढेर के समान है जिसके चारों ओर सोसन फूल हों।

3तेरी दोनों छातियाँ मृगनी के दो जुड़वे बच्चों के समान हैं।

4तेरा गला हाथी दाँत का मीनार है7:4 हाथी दाँत का मीनार है: यह सम्भवतः सुलैमान द्वारा निर्मित हाथी दाँत की मीनार थी जिससे तुलना की जा रही है।। तेरी आँखें हेशबोन के उन कुण्डों के समान हैं, जो बत्रब्बीम के फाटक के पास हैं। तेरी नाक लबानोन के मीनार के तुल्य है, जिसका मुख दमिश्क की ओर है।

5तेरा सिर तुझ पर कर्मेल के समान शोभायमान है, और तेरे सिर के लटें बैंगनी रंग के वस्त्र के तुल्य है; राजा उन लटाओं में बँधुआ हो गया हैं।

6हे प्रिय और मनभावनी कुमारी, तू कैसी सुन्दर और कैसी मनोहर है!

7तेरा डील-डौल7:7 तेरा डील-डौल: अब राजा वधू के विषय कहता है, उसकी तुलना खजूर, अंगूर और सेबों के साथ की गई है और उसके शरीर की शालीनता और फल की मनमोहकता से तथा उसके मुख के वचनों की तुलना मधुर मदिरा से की गई है। खजूर के समान शानदार है और तेरी छातियाँ अंगूर के गुच्छों के समान हैं।

8मैंने कहा, “मैं इस खजूर पर चढ़कर उसकी डालियों को पकड़ूँगा।” तेरी छातियाँ अंगूर के गुच्छे हों, और तेरी श्वास का सुगन्ध सेबों के समान हो,

9और तेरे चुम्बन उत्तम दाखमधु के समान हैं वधू जो सरलता से होठों पर से धीरे धीरे बह जाती है।

10मैं अपनी प्रेमी की हूँ। और उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है7:10 उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है: उसके सम्पूर्ण आकर्षण का केन्द्र मैं ही हूँ। वधू उसकी प्रेम पूर्ण लालसा पर अपना प्रभाव दर्शाने के लिए अग्रसर होती है।।

11हे मेरे प्रेमी, आ, हम खेतों में निकल जाएँ और गाँवों में रहें;

12फिर सवेरे उठकर दाख की बारियों में चलें, और देखें कि दाखलता में कलियाँ लगी हैं कि नहीं, कि दाख के फूल खिले हैं या नहीं, और अनार फूले हैं या नहीं। वहाँ मैं तुझको अपना प्रेम दिखाऊँगी।

13दूदाफलों से सुगन्ध आ रही है, और हमारे द्वारों पर सब भाँति के उत्तम फल हैं, नये और पुराने भी, जो, हे मेरे प्रेमी, मैंने तेरे लिये इकट्ठे कर रखे हैं।

स्रोत: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन

WEBREATH · 11:11

«वह तो आप ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है» — प्रेरितों के काम 17:25

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं