عیسائیت
واپس

ग़ज़लुल-ग़ज़लात 5

1मेरी बहन, मेरी दुलहन, अब मैं अपने बाग़ में दाख़िल हो गया हूँ। मैंने अपना मुर अपने बलसान समेत चुन लिया, अपना छत्ता शहद समेत खा लिया, अपनी मै अपने दूध समेत पी ली है। खाओ, मेरे दोस्तो, खाओ और पियो, मुहब्बत से सरशार हो जाओ!

2मैं सो रही थी, लेकिन मेरा दिल बेदार रहा। सुन! मेरा महबूब दस्तक दे रहा है, “ऐ मेरी बहन, मेरी साथी, मेरे लिए दरवाज़ा खोल दे! ऐ मेरी कबूतरी, मेरी कामिल साथी, मेरा सर ओस से तर हो गया है, मेरी ज़ुल्फ़ें रात की शबनम से भीग गई हैं।”

3“मैं अपना लिबास उतार चुकी हूँ, अब मैं किस तरह उसे दुबारा पहन लूँ? मैं अपने पाँव धो चुकी हूँ, अब मैं उन्हें किस तरह दुबारा मैला करूँ?”

4मेरे महबूब ने अपना हाथ दीवार के सूराख़ में से अंदर डाल दिया। तब मेरा दिल तड़प उठा।

5मैं उठी ताकि अपने महबूब के लिए दरवाज़ा खोलूँ। मेरे हाथ मुर से, मेरी उँगलियाँ मुर की ख़ुशबू से टपक रही थीं जब मैं कुंडी खोलने आई।

6मैंने अपने महबूब के लिए दरवाज़ा खोल दिया, लेकिन वह मुड़कर चला गया था। मुझे सख़्त सदमा हुआ। मैंने उसे तलाश किया लेकिन न मिला। मैंने उसे आवाज़ दी, लेकिन जवाब न मिला।

7जो चौकीदार शहर में गश्त करते हैं उनसे मेरा वास्ता पड़ा, उन्होंने मेरी पिटाई करके मुझे ज़ख़मी कर दिया। फ़सील के चौकीदारों ने मेरी चादर भी छीन ली।

8ऐ यरूशलम की बेटियो, क़सम खाओ कि अगर मेरा महबूब मिला तो उसे इत्तला दोगी, मैं मुहब्बत के मारे बीमार हो गई हूँ।

9तू जो औरतों में सबसे हसीन है, हमें बता, तेरे महबूब की क्या ख़ासियत है जो दूसरों में नहीं है? तेरा महबूब दूसरों से किस तरह सबक़त रखता है कि तू हमें ऐसी क़सम खिलाना चाहती है?

10मेरे महबूब की जिल्द गुलाबी और सफ़ेद है। हज़ारों के साथ उसका मुक़ाबला करो तो उसका आला किरदार नुमायाँ तौर पर नज़र आएगा।

11उसका सर ख़ालिस सोने का है, उसके बाल खजूर के फूलदार गुच्छों की मानिंद और कौवे की तरह स्याह हैं।

12उस की आँखें नदियों के किनारे के कबूतरों की मानिंद हैं, जो दूध में नहलाए और कसरत के पानी के पास बैठे हैं।

13उसके गाल बलसान की क्यारी की मानिंद, उसके होंट मुर से टपकते सोसन के फूलों जैसे हैं।

14उसके बाज़ू सोने की सलाखें हैं जिनमें पुखराज जड़े हुए हैं, उसका जिस्म हाथीदाँत का शाहकार है जिसमें संगे-लाजवर्द के पत्थर लगे हैं।

15उस की रानें मरमर के सतून हैं जो ख़ालिस सोने के पाइयों पर लगे हैं। उसका हुलिया लुबनान और देवदार के दरख़्तों जैसा उम्दा है।

16उसका मुँह मिठास ही है, ग़रज़ वह हर लिहाज़ से पसंदीदा है। ऐ यरूशलम की बेटियो, यह है मेरा महबूब, मेरा दोस्त।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath