عیسائیت
واپس

ग़ज़लुल-ग़ज़लात 3

1रात को जब मैं बिस्तर पर लेटी थी तो मैंने उसे ढूँडा जो मेरी जान का प्यारा है, मैंने उसे ढूँडा लेकिन न पाया।

2मैं बोली, “अब मैं उठकर शहर में घूमती, उस की गलियों और चौकों में फिरकर उसे तलाश करती हूँ जो मेरी जान का प्यारा है।” मैं ढूँडती रही लेकिन वह न मिला।

3जो चौकीदार शहर में गश्त करते हैं उन्होंने मुझे देखा। मैंने पूछा, “क्या आपने उसे देखा है जो मेरी जान का प्यारा है?”

4आगे निकलते ही मुझे वह मिल गया जो मेरी जान का प्यारा है। मैंने उसे पकड़ लिया। अब मैं उसे नहीं छोड़ूँगी जब तक उसे अपनी माँ के घर में न ले जाऊँ, उसके कमरे में न पहुँचाऊँ जिसने मुझे जन्म दिया था।

5ऐ यरूशलम की बेटियो, ग़ज़ालों और खुले मैदान की हिरनियों की क़सम खाओ कि जब तक मुहब्बत ख़ुद न चाहे तुम उसे न जगाओगी, न बेदार करोगी।

6यह कौन है जो धुएँ के सतून की तरह सीधा हमारे पास चला आ रहा है? उससे चारों तरफ़ मुर, बख़ूर और ताजिर की तमाम ख़ुशबुएँ फैल रही हैं।

7यह तो सुलेमान की पालकी है जो इसराईल के 60 पहलवानों से घिरी हुई है।

8सब तलवार से लैस और तजरबाकार फ़ौजी हैं। हर एक ने अपनी तलवार को रात के हौलनाक ख़तरों का सामना करने के लिए तैयार कर रखा है।

9सुलेमान बादशाह ने ख़ुद यह पालकी लुबनान के देवदार की लकड़ी से बनवाई।

10उसने उसके पाए चाँदी से, पुश्त सोने से, और निशस्त अरग़वानी रंग के कपड़े से बनवाई। यरूशलम की बेटियों ने बड़े प्यार से उसका अंदरूनी हिस्सा मुरस्साकारी से आरास्ता किया है।

11ऐ सिय्यून की बेटियो, निकल आओ और सुलेमान बादशाह को देखो। उसके सर पर वह ताज है जो उस की माँ ने उस की शादी के दिन उसके सर पर पहनाया, उस दिन जब उसका दिल बाग़ बाग़ हुआ।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath