ज़बूर 97
1रब बादशाह है! ज़मीन जशन मनाए, साहिली इलाक़े दूर दूर तक ख़ुश हों।
2वह बादलों और गहरे अंधेरे से घिरा रहता है, रास्ती और इनसाफ़ उसके तख़्त की बुनियाद हैं।
3आग उसके आगे आगे भड़ककर चारों तरफ़ उसके दुश्मनों को भस्म कर देती है।
4उस की कड़कती बिजलियों ने दुनिया को रौशन कर दिया तो ज़मीन यह देखकर पेचो-ताब खाने लगी।
5रब के आगे आगे, हाँ पूरी दुनिया के मालिक के आगे आगे पहाड़ मोम की तरह पिघल गए।
6आसमानों ने उस की रास्ती का एलान किया, और तमाम क़ौमों ने उसका जलाल देखा।
7तमाम बुतपरस्त, हाँ सब जो बुतों पर फ़ख़र करते हैं शरमिंदा हों। ऐ तमाम माबूदो, उसे सिजदा करो!
8कोहे-सिय्यून सुनकर ख़ुश हुआ। ऐ रब, तेरे फ़ैसलों के बाइस यहूदाह की बेटियाँ बाग़ बाग़ हुईं।
9क्योंकि तू ऐ रब, पूरी दुनिया पर सबसे आला है, तू तमाम माबूदों से सरबुलंद है।
10तुम जो रब से मुहब्बत रखते हो, बुराई से नफ़रत करो! रब अपने ईमानदारों की जान को महफ़ूज़ रखता है, वह उन्हें बेदीनों के क़ब्ज़े से छुड़ाता है।
11रास्तबाज़ के लिए नूर का और दिल के दियानतदारों के लिए शादमानी का बीज बोया गया है।
12ऐ रास्तबाज़ो, रब से ख़ुश हो, उसके मुक़द्दस नाम की सताइश करो।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath