عیسائیت
واپس

ज़बूर 89

1ऐतान इज़राही का हिकमत का गीत। मैं अबद तक रब की मेहरबानियों की मद्हसराई करूँगा, पुश्त-दर-पुश्त मुँह से तेरी वफ़ा का एलान करूँगा।

2क्योंकि मैं बोला, “तेरी शफ़क़त हमेशा तक क़ायम है, तूने अपनी वफ़ा की मज़बूत बुनियाद आसमान पर ही रखी है।”

3तूने फ़रमाया, “मैंने अपने चुने हुए बंदे से अहद बाँधा, अपने ख़ादिम दाऊद से क़सम खाकर वादा किया है,

4‘मैं तेरी नसल को हमेशा तक क़ायम रखूँगा, तेरा तख़्त हमेशा तक मज़बूत रखूँगा’।” (सिलाह)

5ऐ रब, आसमान तेरे मोजिज़ों की सताइश करेंगे, मुक़द्दसीन की जमात में ही तेरी वफ़ादारी की तमजीद करेंगे।

6क्योंकि बादलों में कौन रब की मानिंद है? इलाही हस्तियों में से कौन रब की मानिंद है?

7जो भी मुक़द्दसीन की मजलिस में शामिल हैं वह अल्लाह से ख़ौफ़ खाते हैं। जो भी उसके इर्दगिर्द होते हैं उन पर उस की अज़मत और रोब छाया रहता है।

8ऐ रब, ऐ लशकरों के ख़ुदा, कौन तेरी मानिंद है? ऐ रब, तू क़वी और अपनी वफ़ा से घिरा रहता है।

9तू ठाठें मारते हुए समुंदर पर हुकूमत करता है। जब वह मौजज़न हो तो तू उसे थमा देता है।

10तूने समुंदरी अज़दहे रहब को कुचल दिया, और वह मक़तूल की मानिंद बन गया। अपने क़वी बाज़ू से तूने अपने दुश्मनों को तित्तर-बित्तर कर दिया।

11आसमानो-ज़मीन तेरे ही हैं। दुनिया और जो कुछ उसमें है तूने क़ायम किया।

12तूने शिमालो-जुनूब को ख़लक़ किया। तबूर और हरमून तेरे नाम की ख़ुशी में नारे लगाते हैं।

13तेरा बाज़ू क़वी और तेरा हाथ ताक़तवर है। तेरा दहना हाथ अज़ीम काम करने के लिए तैयार है।

14रास्ती और इनसाफ़ तेरे तख़्त की बुनियाद हैं। शफ़क़त और वफ़ा तेरे आगे आगे चलती हैं।

15मुबारक है वह क़ौम जो तेरी ख़ुशी के नारे लगा सके। ऐ रब, वह तेरे चेहरे के नूर में चलेंगे।

16रोज़ाना वह तेरे नाम की ख़ुशी मनाएँगे और तेरी रास्ती से सरफ़राज़ होंगे।

17क्योंकि तू ही उनकी ताक़त की शान है, और तू अपने करम से हमें सरफ़राज़ करेगा।

18क्योंकि हमारी ढाल रब ही की है, हमारा बादशाह इसराईल के क़ुद्दूस ही का है।

19माज़ी में तू रोया में अपने ईमानदारों से हमकलाम हुआ। उस वक़्त तूने फ़रमाया, “मैंने एक सूरमे को ताक़त से नवाज़ा है, क़ौम में से एक को चुनकर सरफ़राज़ किया है।

20मैंने अपने ख़ादिम दाऊद को पा लिया और उसे अपने मुक़द्दस तेल से मसह किया है।

21मेरा हाथ उसे क़ायम रखेगा, मेरा बाज़ू उसे तक़वियत देगा।

22दुश्मन उस पर ग़ालिब नहीं आएगा, शरीर उसे ख़ाक में नहीं मिलाएँगे।

23उसके आगे आगे मैं उसके दुश्मनों को पाश पाश करूँगा। जो उससे नफ़रत रखते हैं उन्हें ज़मीन पर पटख़ दूँगा।

24मेरी वफ़ा और मेरी शफ़क़त उसके साथ रहेंगी, मेरे नाम से वह सरफ़राज़ होगा।

25मैं उसके हाथ को समुंदर पर और उसके दहने हाथ को दरियाओं पर हुकूमत करने दूँगा।

26वह मुझे पुकारकर कहेगा, ‘तू मेरा बाप, मेरा ख़ुदा और मेरी नजात की चट्टान है।’

27मैं उसे अपना पहलौठा और दुनिया का सबसे आला बादशाह बनाऊँगा।

28मैं उसे हमेशा तक अपनी शफ़क़त से नवाज़ता रहूँगा, मेरा उसके साथ अहद कभी तमाम नहीं होगा।

29मैं उस की नसल हमेशा तक क़ायम रखूँगा, जब तक आसमान क़ायम है उसका तख़्त क़ायम रखूँगा।

30अगर उसके बेटे मेरी शरीअत तर्क करके मेरे अहकाम पर अमल न करें,

31अगर वह मेरे फ़रमानों की बेहुरमती करके मेरी हिदायात के मुताबिक़ ज़िंदगी न गुज़ारें

32तो मैं लाठी लेकर उनकी तादीब करूँगा और मोहलक वबाओं से उनके गुनाहों की सज़ा दूँगा।

33लेकिन मैं उसे अपनी शफ़क़त से महरूम नहीं करूँगा, अपनी वफ़ा का इनकार नहीं करूँगा।

34न मैं अपने अहद की बेहुरमती करूँगा, न वह कुछ तबदील करूँगा जो मैंने फ़रमाया है।

35मैंने एक बार सदा के लिए अपनी क़ुद्दूसियत की क़सम खाकर वादा किया है, और मैं दाऊद को कभी धोका नहीं दूँगा।

36उस की नसल अबद तक क़ायम रहेगी, उसका तख़्त आफ़ताब की तरह मेरे सामने खड़ा रहेगा।

37चाँद की तरह वह हमेशा तक बरक़रार रहेगा, और जो गवाह बादलों में है वह वफ़ादार है।” (सिलाह)

38लेकिन अब तूने अपने मसह किए हुए ख़ादिम को ठुकराकर रद्द किया, तू उससे ग़ज़बनाक हो गया है।

39तूने अपने ख़ादिम का अहद नामंज़ूर किया और उसका ताज ख़ाक में मिलाकर उस की बेहुरमती की है।

40तूने उस की तमाम फ़सीलें ढाकर उसके क़िलों को मलबे के ढेर बना दिया है।

41जो भी वहाँ से गुज़रे वह उसे लूट लेता है। वह अपने पड़ोसियों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गया है।

42तूने उसके मुख़ालिफ़ों का दहना हाथ सरफ़राज़ किया, उसके तमाम दुश्मनों को ख़ुश कर दिया है।

43तूने उस की तलवार की तेज़ी बेअसर करके उसे जंग में फ़तह पाने से रोक दिया है।

44तूने उस की शान ख़त्म करके उसका तख़्त ज़मीन पर पटख़ दिया है।

45तूने उस की जवानी के दिन मुख़तसर करके उसे रुसवाई की चादर में लपेटा है। (सिलाह)

46ऐ रब, कब तक? क्या तू अपने आपको हमेशा तक छुपाए रखेगा? क्या तेरा क़हर अबद तक आग की तरह भड़कता रहेगा?

47याद रहे कि मेरी ज़िंदगी कितनी मुख़तसर है, कि तूने तमाम इनसान कितने फ़ानी ख़लक़ किए हैं।

48कौन है जिसका मौत से वास्ता न पड़े, कौन है जो हमेशा ज़िंदा रहे? कौन अपनी जान को मौत के क़ब्ज़े से बचाए रख सकता है? (सिलाह)

49ऐ रब, तेरी वह पुरानी मेहरबानियाँ कहाँ हैं जिनका वादा तूने अपनी वफ़ा की क़सम खाकर दाऊद से किया?

50ऐ रब, अपने ख़ादिमों की ख़जालत याद कर। मेरा सीना मुतअद्दिद क़ौमों की लान-तान से दुखता है,

51क्योंकि ऐ रब, तेरे दुश्मनों ने मुझे लान-तान की, उन्होंने तेरे मसह किए हुए ख़ादिम को हर क़दम पर लान-तान की है!

52अबद तक रब की हम्द हो! आमीन, फिर आमीन।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath