ज़बूर 79
1आसफ़ का ज़बूर। ऐ अल्लाह, अजनबी क़ौमें तेरी मौरूसी ज़मीन में घुस आई हैं। उन्होंने तेरी मुक़द्दस सुकूनतगाह की बेहुरमती करके यरूशलम को मलबे का ढेर बना दिया है।
2उन्होंने तेरे ख़ादिमों की लाशें परिंदों को और तेरे ईमानदारों का गोश्त जंगली जानवरों को खिला दिया है।
3यरूशलम के चारों तरफ़ उन्होंने ख़ून की नदियाँ बहाईं, और कोई बाक़ी न रहा जो मुरदों को दफ़नाता।
4हमारे पड़ोसियों ने हमें मज़ाक़ का निशाना बना लिया है, इर्दगिर्द की क़ौमें हमारी हँसी उड़ाती और लान-तान करती हैं।
5ऐ रब, कब तक? क्या तू हमेशा तक ग़ुस्से होगा? तेरी ग़ैरत कब तक आग की तरह भड़कती रहेगी?
6अपना ग़ज़ब उन अक़वाम पर नाज़िल कर जो तुझे तसलीम नहीं करतीं, उन सलतनतों पर जो तेरे नाम को नहीं पुकारतीं।
7क्योंकि उन्होंने याक़ूब को हड़प करके उस की रिहाइशगाह तबाह कर दी है।
8हमें उन गुनाहों के क़ुसूरवार न ठहरा जो हमारे बापदादा से सरज़द हुए। हम पर रहम करने में जल्दी कर, क्योंकि हम बहुत पस्तहाल हो गए हैं।
9ऐ हमारी नजात के ख़ुदा, हमारी मदद कर ताकि तेरे नाम को जलाल मिले। हमें बचा, अपने नाम की ख़ातिर हमारे गुनाहों को मुआफ़ कर।
10दीगर अक़वाम क्यों कहें, “उनका ख़ुदा कहाँ है?” हमारे देखते देखते उन्हें दिखा कि तू अपने ख़ादिमों के ख़ून का बदला लेता है।
11क़ैदियों की आहें तुझ तक पहुँचीं, जो मरने को हैं उन्हें अपनी अज़ीम क़ुदरत से महफ़ूज़ रख।
12ऐ रब, जो लान-तान हमारे पड़ोसियों ने तुझ पर बरसाई है उसे सात गुना उनके सरों पर वापस ला।
13तब हम जो तेरी क़ौम और तेरी चरागाह की भेड़ें हैं अबद तक तेरी सताइश करेंगे, पुश्त-दर-पुश्त तेरी हम्दो-सना करेंगे।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath