ज़बूर 57
1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : तबाह न कर। यह सुनहरा गीत उस वक़्त से मुताल्लिक़ है जब वह साऊल से भागकर ग़ार में छुप गया। ऐ अल्लाह, मुझ पर मेहरबानी कर, मुझ पर मेहरबानी कर! क्योंकि मेरी जान तुझमें पनाह लेती है। जब तक आफ़त मुझ पर से गुज़र न जाए मैं तेरे परों के साये में पनाह लूँगा।
2मैं अल्लाह तआला को पुकारता हूँ, अल्लाह से जो मेरा मामला ठीक करेगा।
3वह आसमान से मदद भेजकर मुझे छुटकारा देगा और उनकी रुसवाई करेगा जो मुझे तंग कर रहे हैं। (सिलाह) अल्लाह अपना करम और वफ़ादारी भेजेगा।
4मैं इनसान को हड़प करनेवाले शेरबबरों के बीच में लेटा हुआ हूँ, उनके दरमियान जिनके दाँत नेज़े और तीर हैं और जिनकी ज़बान तेज़ तलवार है।
5ऐ अल्लाह, आसमान पर सरबुलंद हो जा! तेरा जलाल पूरी दुनिया पर छा जाए!
6उन्होंने मेरे क़दमों के आगे फंदा बिछा दिया, और मेरी जान ख़ाक में दब गई है। उन्होंने मेरे सामने गढ़ा खोद लिया, लेकिन वह ख़ुद उसमें गिर गए हैं। (सिलाह)
7ऐ अल्लाह, मेरा दिल मज़बूत, मेरा दिल साबितक़दम है। मैं साज़ बजाकर तेरी मद्हसराई करूँगा।
8ऐ मेरी जान, जाग उठ! ऐ सितार और सरोद, जाग उठो! आओ, मैं तुलूए-सुबह को जगाऊँ।
9ऐ रब, क़ौमों में मैं तेरी सताइश, उम्मतों में तेरी मद्हसराई करूँगा।
10क्योंकि तेरी अज़ीम शफ़क़त आसमान जितनी बुलंद है, तेरी वफ़ादारी बादलों तक पहुँचती है।
11ऐ अल्लाह, आसमान पर सरफ़राज़ हो! तेरा जलाल पूरी दुनिया पर छा जाए।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath