عیسائیت
واپس

ज़बूर 50

1आसफ़ का ज़बूर। रब क़ादिरे-मुतलक़ ख़ुदा बोल उठा है, उसने तुलूए-सुबह से लेकर ग़ुरूबे-आफ़ताब तक पूरी दुनिया को बुलाया है।

2अल्लाह का नूर सिय्यून से चमक उठा है, उस पहाड़ से जो कामिल हुस्न का इज़हार है।

3हमारा ख़ुदा आ रहा है, वह ख़ामोश नहीं रहेगा। उसके आगे आगे सब कुछ भस्म हो रहा है, उसके इर्दगिर्द तेज़ आँधी चल रही है।

4वह आसमानो-ज़मीन को आवाज़ देता है, “अब मैं अपनी क़ौम की अदालत करूँगा।

5मेरे ईमानदारों को मेरे हुज़ूर जमा करो, उन्हें जिन्होंने क़ुरबानियाँ पेश करके मेरे साथ अहद बाँधा है।”

6आसमान उस की रास्ती का एलान करेंगे, क्योंकि अल्लाह ख़ुद इनसाफ़ करनेवाला है। (सिलाह)

7“ऐ मेरी क़ौम, सुन! मुझे बात करने दे। ऐ इसराईल, मैं तेरे ख़िलाफ़ गवाही दूँगा। मैं अल्लाह तेरा ख़ुदा हूँ।

8मैं तुझे तेरी ज़बह की क़ुरबानियों के बाइस मलामत नहीं कर रहा। तेरी भस्म होनेवाली क़ुरबानियाँ तो मुसलसल मेरे सामने हैं।

9न मैं तेरे घर से बैल लूँगा, न तेरे बाड़ों से बकरे।

10क्योंकि जंगल के तमाम जानदार मेरे ही हैं, हज़ारों पहाड़ियों पर बसनेवाले जानवर मेरे ही हैं।

11मैं पहाड़ों के हर परिंदे को जानता हूँ, और जो भी मैदानों में हरकत करता है वह मेरा है।

12अगर मुझे भूक लगती तो मैं तुझे न बताता, क्योंकि ज़मीन और जो कुछ उस पर है मेरा है।

13क्या तू समझता है कि मैं साँडों का गोश्त खाना या बकरों का ख़ून पीना चाहता हूँ?

14अल्लाह को शुक्रगुज़ारी की क़ुरबानी पेश कर, और वह मन्नत पूरी कर जो तूने अल्लाह तआला के हुज़ूर मानी है।

15मुसीबत के दिन मुझे पुकार। तब मैं तुझे नजात दूँगा और तू मेरी तमजीद करेगा।”

16लेकिन बेदीन से अल्लाह फ़रमाता है, “मेरे अहकाम सुनाने और मेरे अहद का ज़िक्र करने का तेरा क्या हक़ है?

17तू तो तरबियत से नफ़रत करता और मेरे फ़रमान कचरे की तरह अपने पीछे फेंक देता है।

18किसी चोर को देखते ही तू उसका साथ देता है, तू ज़िनाकारों से रिफ़ाक़त रखता है।

19तू अपने मुँह को बुरे काम के लिए इस्तेमाल करता, अपनी ज़बान को धोका देने के लिए तैयार रखता है।

20तू दूसरों के पास बैठकर अपने भाई के ख़िलाफ़ बोलता है, अपनी ही माँ के बेटे पर तोहमत लगाता है।

21यह कुछ तूने किया है, और मैं ख़ामोश रहा। तब तू समझा कि मैं बिलकुल तुझ जैसा हूँ। लेकिन मैं तुझे मलामत करूँगा, तेरे सामने ही मामला तरतीब से सुनाऊँगा।

22तुम जो अल्लाह को भूले हुए हो, बात समझ लो, वरना मैं तुम्हें फाड़ डालूँगा। उस वक़्त कोई नहीं होगा जो तुम्हें बचाए।

23जो शुक्रगुज़ारी की क़ुरबानी पेश करे वह मेरी ताज़ीम करता है। जो मुसम्मम इरादे से ऐसी राह पर चले उसे मैं अल्लाह की नजात दिखाऊँगा।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath