عیسائیت
واپس

ज़बूर 30

1दाऊद का ज़बूर। रब के घर की मख़सूसियत के मौक़े पर गीत। ऐ रब, मैं तेरी सताइश करता हूँ, क्योंकि तूने मुझे गहराइयों में से खींच निकाला। तूने मेरे दुश्मनों को मुझ पर बग़लें बजाने का मौक़ा नहीं दिया।

2ऐ रब मेरे ख़ुदा, मैंने चीख़ते-चिल्लाते हुए तुझसे मदद माँगी, और तूने मुझे शफ़ा दी।

3ऐ रब, तू मेरी जान को पाताल से निकाल लाया, तूने मेरी जान को मौत के गढ़े में उतरने से बचाया है।

4ऐ ईमानदारो, साज़ बजाकर रब की तारीफ़ में गीत गाओ। उसके मुक़द्दस नाम की हम्दो-सना करो।

5क्योंकि वह लमहा-भर के लिए ग़ुस्से होता, लेकिन ज़िंदगी-भर के लिए मेहरबानी करता है। गो शाम को रोना पड़े, लेकिन सुबह को हम ख़ुशी मनाएँगे।

6जब हालात पुरसुकून थे तो मैं बोला, “मैं कभी नहीं डगमगाऊँगा।”

7ऐ रब, जब तू मुझसे ख़ुश था तो तूने मुझे मज़बूत पहाड़ पर रख दिया। लेकिन जब तूने अपना चेहरा मुझसे छुपा लिया तो मैं सख़्त घबरा गया।

8ऐ रब, मैंने तुझे पुकारा, हाँ ख़ुदावंद से मैंने इल्तिजा की,

9“क्या फ़ायदा है अगर मैं हलाक होकर मौत के गढ़े में उतर जाऊँ? क्या ख़ाक तेरी सताइश करेगी? क्या वह लोगों को तेरी वफ़ादारी के बारे में बताएगी?

10ऐ रब, मेरी सुन, मुझ पर मेहरबानी कर। ऐ रब, मेरी मदद करने के लिए आ!”

11तूने मेरा मातम ख़ुशी के नाच में बदल दिया, तूने मेरे मातमी कपड़े उतारकर मुझे शादमानी से मुलब्बस किया।

12क्योंकि तू चाहता है कि मेरी जान ख़ामोश न हो बल्कि गीत गाकर तेरी तमजीद करती रहे। ऐ रब मेरे ख़ुदा, मैं अबद तक तेरी हम्दो-सना करूँगा।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath