ज़बूर 28
1दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, मैं तुझे पुकारता हूँ। ऐ मेरी चट्टान, ख़ामोशी से अपना मुँह मुझसे न फेर। क्योंकि अगर तू चुप रहे तो मैं मौत के गढ़े में उतरनेवालों की मानिंद हो जाऊँगा।
2मेरी इल्तिजाएँ सुन जब मैं चीख़ते-चिल्लाते तुझसे मदद माँगता हूँ, जब मैं अपने हाथ तेरी सुकूनतगाह के मुक़द्दसतरीन कमरे की तरफ़ उठाता हूँ।
3मुझे उन बेदीनों के साथ घसीटकर सज़ा न दे जो ग़लत काम करते हैं, जो अपने पड़ोसियों से बज़ाहिर दोस्ताना बातें करते, लेकिन दिल में उनके ख़िलाफ़ बुरे मनसूबे बाँधते हैं।
4उन्हें उनकी हरकतों और बुरे कामों का बदला दे। जो कुछ उनके हाथों से सरज़द हुआ है उस की पूरी सज़ा दे। उन्हें उतना ही नुक़सान पहुँचा दे जितना उन्होंने दूसरों को पहुँचाया है।
5क्योंकि न वह रब के आमाल पर, न उसके हाथों के काम पर तवज्जुह देते हैं। अल्लाह उन्हें ढा देगा और दुबारा कभी तामीर नहीं करेगा।
6रब की तमजीद हो, क्योंकि उसने मेरी इल्तिजा सुन ली।
7रब मेरी क़ुव्वत और मेरी ढाल है। उस पर मेरे दिल ने भरोसा रखा, उससे मुझे मदद मिली है। मेरा दिल शादियाना बजाता है, मैं गीत गाकर उस की सताइश करता हूँ।
8रब अपनी क़ौम की क़ुव्वत और अपने मसह किए हुए ख़ादिम का नजातबख़्श क़िला है।
9ऐ रब, अपनी क़ौम को नजात दे! अपनी मीरास को बरकत दे! उनकी गल्लाबानी करके उन्हें हमेशा तक उठाए रख।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath