ज़बूर 16
1दाऊद का एक सुनहरा ज़बूर। ऐ अल्लाह, मुझे महफ़ूज़ रख, क्योंकि तुझमें मैं पनाह लेता हूँ।
2मैंने रब से कहा, “तू मेरा आक़ा है, तू ही मेरी ख़ुशहाली का वाहिद सरचश्मा है।”
3मुल्क में जो मुक़द्दसीन हैं वही मेरे सूरमे हैं, उन्हीं को मैं पसंद करता हूँ।
4लेकिन जो दीगर माबूदों के पीछे भागे रहते हैं उनकी तकलीफ़ बढ़ती जाएगी। न मैं उनकी ख़ून की क़ुरबानियों को पेश करूँगा, न उनके नामों का ज़िक्र तक करूँगा।
5ऐ रब, तू मेरी मीरास और मेरा हिस्सा है। मेरा नसीब तेरे हाथ में है।
6जब क़ुरा डाला गया तो मुझे ख़ुशगवार ज़मीन मिल गई। यक़ीनन मेरी मीरास मुझे बहुत पसंद है।
7मैं रब की सताइश करूँगा जिसने मुझे मशवरा दिया है। रात को भी मेरा दिल मेरी हिदायत करता है।
8रब हर वक़्त मेरी आँखों के सामने रहता है। वह मेरे दहने हाथ रहता है, इसलिए मैं नहीं डगमगाऊँगा।
9इसलिए मेरा दिल शादमान है, मेरी जान ख़ुशी के नारे लगाती है। हाँ, मेरा बदन पुरसुकून ज़िंदगी गुज़ारेगा।
10क्योंकि तू मेरी जान को पाताल में नहीं छोड़ेगा, और न अपने मुक़द्दस को गलने-सड़ने की नौबत तक पहुँचने देगा।
11तू मुझे ज़िंदगी की राह से आगाह करता है। तेरे हुज़ूर से भरपूर ख़ुशियाँ, तेरे दहने हाथ से अबदी मसर्रतें हासिल होती हैं।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath