ज़बूर 15
1दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, कौन तेरे ख़ैमे में ठहर सकता है? किस को तेरे मुक़द्दस पहाड़ पर रहने की इजाज़त है?
2वह जिसका चाल-चलन बेगुनाह है, जो रास्तबाज़ ज़िंदगी गुज़ारकर दिल से सच बोलता है।
3ऐसा शख़्स अपनी ज़बान से किसी पर तोहमत नहीं लगाता। न वह अपने पड़ोसी पर ज़्यादती करता, न उस की बेइज़्ज़ती करता है।
4वह मरदूद को हक़ीर जानता लेकिन ख़ुदातरस की इज़्ज़त करता है। जो वादा उसने क़सम खाकर किया उसे पूरा करता है, ख़ाह उसे कितना ही नुक़सान क्यों न पहुँचे।
5वह सूद लिए बग़ैर उधार देता है और उस की रिश्वत क़बूल नहीं करता जो बेगुनाह का हक़ मारना चाहता है। ऐसा शख़्स कभी डाँवाँडोल नहीं होगा।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath