ज़बूर 149
1रब की हम्द हो! रब की तमजीद में नया गीत गाओ, ईमानदारों की जमात में उस की तारीफ़ करो।
2इसराईल अपने ख़ालिक़ से ख़ुश हो, सिय्यून के फ़रज़ंद अपने बादशाह की ख़ुशी मनाएँ।
3वह नाचकर उसके नाम की सताइश करें, दफ़ और सरोद से उस की मद्हसराई करें।
4क्योंकि रब अपनी क़ौम से ख़ुश है। वह मुसीबतज़दों को अपनी नजात की शानो-शौकत से आरास्ता करता है।
5ईमानदार इस शानो-शौकत के बाइस ख़ुशी मनाएँ, वह अपने बिस्तरों पर शादमानी के नारे लगाएँ।
6उनके मुँह में अल्लाह की हम्दो-सना और उनके हाथों में दोधारी तलवार हो
7ताकि दीगर अक़वाम से इंतक़ाम लें और उम्मतों को सज़ा दें।
8वह उनके बादशाहों को ज़ंजीरों में और उनके शुरफ़ा को बेड़ियों में जकड़ लेंगे
9ताकि उन्हें वह सज़ा दें जिसका फ़ैसला क़लमबंद हो चुका है। यह इज़्ज़त अल्लाह के तमाम ईमानदारों को हासिल है। रब की हम्द हो!
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath