عیسائیت
واپس

ज़बूर 143

1दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, मेरी दुआ सुन, मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे। अपनी वफ़ादारी और रास्ती की ख़ातिर मेरी सुन!

2अपने ख़ादिम को अपनी अदालत में न ला, क्योंकि तेरे हुज़ूर कोई भी जानदार रास्तबाज़ नहीं ठहर सकता।

3क्योंकि दुश्मन ने मेरी जान का पीछा करके उसे ख़ाक में कुचल दिया है। उसने मुझे उन लोगों की तरह तारीकी में बसा दिया है जो बड़े अरसे से मुरदा हैं।

4मेरे अंदर मेरी रूह निढाल है, मेरे अंदर मेरा दिल दहशत के मारे बेहिसो-हरकत हो गया है।

5मैं क़दीम ज़माने के दिन याद करता और तेरे कामों पर ग़ौरो-ख़ौज़ करता हूँ। जो कुछ तेरे हाथों ने किया उसमें मैं महवे-ख़याल रहता हूँ।

6मैं अपने हाथ तेरी तरफ़ उठाता हूँ, मेरी जान ख़ुश्क ज़मीन की तरह तेरी प्यासी है। (सिलाह)

7ऐ रब, मेरी सुनने में जल्दी कर। मेरी जान तो ख़त्म होनेवाली है। अपना चेहरा मुझसे छुपाए न रख, वरना मैं गढ़े में उतरनेवालों की मानिंद हो जाऊँगा।

8सुबह के वक़्त मुझे अपनी शफ़क़त की ख़बर सुना, क्योंकि मैं तुझ पर भरोसा रखता हूँ। मुझे वह राह दिखा जिस पर मुझे जाना है, क्योंकि मैं तेरा ही आरज़ूमंद हूँ।

9ऐ रब, मुझे मेरे दुश्मनों से छुड़ा, क्योंकि मैं तुझमें पनाह लेता हूँ।

10मुझे अपनी मरज़ी पूरी करना सिखा, क्योंकि तू मेरा ख़ुदा है। तेरा नेक रूह हमवार ज़मीन पर मेरी राहनुमाई करे।

11ऐ रब, अपने नाम की ख़ातिर मेरी जान को ताज़ादम कर। अपनी रास्ती से मेरी जान को मुसीबत से बचा।

12अपनी शफ़क़त से मेरे दुश्मनों को हलाक कर। जो भी मुझे तंग कर रहे हैं उन्हें तबाह कर! क्योंकि मैं तेरा ख़ादिम हूँ।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath