عیسائیت
واپس

ज़बूर 140

1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। ऐ रब, मुझे शरीरों से छुड़ा और ज़ालिमों से महफ़ूज़ रख।

2दिल में वह बुरे मनसूबे बाँधते, रोज़ाना जंग छेड़ते हैं।

3उनकी ज़बान साँप की ज़बान जैसी तेज़ है, और उनके होंटों में साँप का ज़हर है। (सिलाह)

4ऐ रब, मुझे बेदीन के हाथों से महफ़ूज़ रख, ज़ालिम से मुझे बचाए रख, उनसे जो मेरे पाँवों को ठोकर खिलाने के मनसूबे बाँध रहे हैं।

5मग़रूरों ने मेरे रास्ते में फंदा और रस्से छुपाए हैं, उन्होंने जाल बिछाकर रास्ते के किनारे किनारे मुझे पकड़ने के फंदे लगाए हैं। (सिलाह)

6मैं रब से कहता हूँ, “तू ही मेरा ख़ुदा है, मेरी इल्तिजाओं की आवाज़ सुन!”

7ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, ऐ मेरी क़वी नजात! जंग के दिन तू अपनी ढाल से मेरे सर की हिफ़ाज़त करता है।

8ऐ रब, बेदीन का लालच पूरा न कर। उसका इरादा कामयाब होने न दे, ऐसा न हो कि यह लोग सरफ़राज़ हो जाएँ। (सिलाह)

9उन्होंने मुझे घेर लिया है, लेकिन जो आफ़त उनके होंट मुझ पर लाना चाहते हैं वह उनके अपने सरों पर आए!

10दहकते कोयले उन पर बरसें, और उन्हें आग में, अथाह गढ़ों में फेंका जाए ताकि आइंदा कभी न उठें।

11तोहमत लगानेवाला मुल्क में क़ायम न रहे, और बुराई ज़ालिम को मार मारकर उसका पीछा करे।

12मैं जानता हूँ कि रब अदालत में मुसीबतज़दा का दिफ़ा करेगा। वही ज़रूरतमंद का इनसाफ़ करेगा।

13यक़ीनन रास्तबाज़ तेरे नाम की सताइश करेंगे, और दियानतदार तेरे हुज़ूर बसेंगे।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath