عیسائیت
واپس

ज़बूर 136

1रब का शुक्र करो, क्योंकि वह भला है, और उस की शफ़क़त अबदी है।

2ख़ुदाओं के ख़ुदा का शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

3मालिकों के मालिक का शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

4जो अकेला ही अज़ीम मोजिज़े करता है उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

5जिसने हिकमत के साथ आसमान बनाया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

6जिसने ज़मीन को मज़बूती से पानी के ऊपर लगा दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

7जिसने आसमान की रौशनियों को ख़लक़ किया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

8जिसने सूरज को दिन के वक़्त हुकूमत करने के लिए बनाया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

9जिसने चाँद और सितारों को रात के वक़्त हुकूमत करने के लिए बनाया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

10जिसने मिसर में पहलौठों को मार डाला उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

11जो इसराईल को मिसरियों में से निकाल लाया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

12जिसने उस वक़्त बड़ी ताक़त और क़ुदरत का इज़हार किया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

13जिसने बहरे-क़ुलज़ुम को दो हिस्सों में तक़सीम कर दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

14जिसने इसराईल को उसके बीच में से गुज़रने दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

15जिसने फ़िरौन और उस की फ़ौज को बहरे-क़ुलज़ुम में बहाकर ग़रक़ कर दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

16जिसने रेगिस्तान में अपनी क़ौम की क़ियादत की उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

17जिसने बड़े बादशाहों को शिकस्त दी उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

18जिसने ताक़तवर बादशाहों को मार डाला उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

19जिसने अमोरियों के बादशाह सीहोन को मौत के घाट उतारा उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

20जिसने बसन के बादशाह ओज को हलाक कर दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

21जिसने उनका मुल्क इसराईल को मीरास में दिया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

22जिसने उनका मुल्क अपने ख़ादिम इसराईल की मौरूसी मिलकियत बनाया उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

23जिसने हमारा ख़याल किया जब हम ख़ाक में दब गए थे उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

24जिसने हमें उनके क़ब्ज़े से छुड़ाया जो हम पर ज़ुल्म कर रहे थे उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

25जो तमाम जानदारों को ख़ुराक मुहैया करता है उसका शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

26आसमान के ख़ुदा का शुक्र करो, क्योंकि उस की शफ़क़त अबदी है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath