ईसाई धर्म
वापस

भजन संहिता 123

1हे स्वर्ग में विराजमान मैं अपनी आँखें तेरी ओर उठाता हूँ!

2देख, जैसे दासों की आँखें अपने स्वामियों के हाथ की ओर, और जैसे दासियों की आँखें अपनी स्वामिनी के हाथ की ओर लगी रहती है, वैसे ही हमारी आँखें हमारे परमेश्वर यहोवा की ओर उस समय तक लगी रहेंगी, जब तक वह हम पर दया न करे।

3हम पर दया कर, हे यहोवा, हम पर कृपा कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत ही भर गए हैं।

4हमारा जीव सुखी लोगों के उपहास से, और अहंकारियों के अपमान से123:4 अहंकारियों के अपमान से: जो पद में, अपनी स्थिति में, या अपनी भावनाओं में बड़े हैं। कहने का अर्थ है कि अपमान करनेवाले वे हैं जिनकी ओर मनुष्य आशा से निहारता हैं। बहुत ही भर गया है।

स्रोत: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन

WEBREATH · 11:11

«वह तो आप ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है» — प्रेरितों के काम 17:25

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं