भजन संहिता 120
1संकट के समय मैंने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली।
2हे यहोवा, झूठ बोलनेवाले मुँह से और छली जीभ से मेरी रक्षा कर।
3हे छली जीभ, तुझको क्या मिले? और तेरे साथ और क्या अधिक किया जाए?
4वीर के नोकीले तीर और झाऊ के अंगारे!
5हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है!
6बहुत समय से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है।
7मैं तो मेल चाहता हूँ; परन्तु मेरे बोलते120:7 मेरे बोलते: जब भी इसकी चर्चा करता हूँ, में जब भी अपनी दु:खित भावनाओं को व्यक्त करता हूँ, वे अनसुना करते हैं; उन्हें किसी बात से सन्तोष नहीं होता है। ही, वे लड़ना चाहते हैं!
स्रोत: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
WEBREATH · 11:11
«वह तो आप ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है» — प्रेरितों के काम 17:25
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं