عیسائیت
واپس

ज़बूर 103

1दाऊद का ज़बूर। ऐ मेरी जान, रब की सताइश कर! मेरा रगो-रेशा उसके क़ुद्दूस नाम की हम्द करे!

2ऐ मेरी जान, रब की सताइश कर और जो कुछ उसने तेरे लिए किया है उसे भूल न जा।

3क्योंकि वह तेरे तमाम गुनाहों को मुआफ़ करता, तुझे तमाम बीमारियों से शफ़ा देता है।

4वह एवज़ाना देकर तेरी जान को मौत के गढ़े से छुड़ा लेता, तेरे सर को अपनी शफ़क़त और रहमत के ताज से आरास्ता करता है।

5वह तेरी ज़िंदगी को अच्छी चीज़ों से सेर करता है, और तू दुबारा जवान होकर उक़ाब की-सी तक़वियत पाता है।

6रब तमाम मज़लूमों के लिए रास्ती और इनसाफ़ क़ायम करता है।

7उसने अपनी राहें मूसा पर और अपने अज़ीम काम इसराईलियों पर ज़ाहिर किए।

8रब रहीम और मेहरबान है, वह तहम्मुल और शफ़क़त से भरपूर है।

9न वह हमेशा डाँटता रहेगा, न अबद तक नाराज़ रहेगा।

10न वह हमारी ख़ताओं के मुताबिक़ सज़ा देता, न हमारे गुनाहों का मुनासिब अज्र देता है।

11क्योंकि जितना बुलंद आसमान है, उतनी ही अज़ीम उस की शफ़क़त उन पर है जो उसका ख़ौफ़ मानते हैं।

12जितनी दूर मशरिक़ मग़रिब से है उतना ही उसने हमारे क़ुसूर हमसे दूर कर दिए हैं।

13जिस तरह बाप अपने बच्चों पर तरस खाता है उसी तरह रब उन पर तरस खाता है जो उसका ख़ौफ़ मानते हैं।

14क्योंकि वह हमारी साख़्त जानता है, उसे याद है कि हम ख़ाक ही हैं।

15इनसान के दिन घास की मानिंद हैं, और वह जंगली फूल की तरह ही फलता-फूलता है।

16जब उस पर से हवा गुज़रे तो वह नहीं रहता, और उसके नामो-निशान का भी पता नहीं चलता।

17लेकिन जो रब का ख़ौफ़ मानें उन पर वह हमेशा तक मेहरबानी करेगा, वह अपनी रास्ती उनके पोतों और नवासों पर भी ज़ाहिर करेगा।

18शर्त यह है कि वह उसके अहद के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारें और ध्यान से उसके अहकाम पर अमल करें।

19रब ने आसमान पर अपना तख़्त क़ायम किया है, और उस की बादशाही सब पर हुकूमत करती है।

20ऐ रब के फ़रिश्तो, उसके ताक़तवर सूरमाओ, जो उसके फ़रमान पूरे करते हो ताकि उसका कलाम माना जाए, रब की सताइश करो!

21ऐ तमाम लशकरो, तुम सब जो उसके ख़ादिम हो और उस की मरज़ी पूरी करते हो, रब की सताइश करो!

22तुम सब जिन्हें उसने बनाया, रब की सताइश करो! उस की सलतनत की हर जगह पर उस की तमजीद करो। ऐ मेरी जान, रब की सताइश कर!

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath