عیسائیت
واپس

अमसाल 2

1मेरे बेटे, मेरी बात क़बूल करके मेरे अहकाम अपने दिल में महफ़ूज़ रख।

2अपना कान हिकमत पर धर, अपना दिल समझ की तरफ़ मायल कर।

3बसीरत के लिए आवाज़ दे, चिल्लाकर समझ माँग।

4उसे यों तलाश कर गोया चाँदी हो, उसका यों खोज लगा गोया पोशीदा ख़ज़ाना हो।

5अगर तू ऐसा करे तो तुझे रब के ख़ौफ़ की समझ आएगी और अल्लाह का इरफ़ान हासिल होगा।

6क्योंकि रब ही हिकमत अता करता, उसी के मुँह से इरफ़ान और समझ निकलती है।

7वह सीधी राह पर चलनेवालों को कामयाबी फ़राहम करता और बेइलज़ाम ज़िंदगी गुज़ारनेवालों की ढाल बना रहता है।

8क्योंकि वह इनसाफ़ पसंदों की राहों की पहरादारी करता है। जहाँ भी उसके ईमानदार चलते हैं वहाँ वह उनकी हिफ़ाज़त करता है।

9तब तुझे रास्ती, इनसाफ़, दियानतदारी और हर अच्छी राह की समझ आएगी।

10क्योंकि तेरे दिल में हिकमत दाख़िल हो जाएगी, और इल्मो-इरफ़ान तेरी जान को प्यारा हो जाएगा।

11तमीज़ तेरी हिफ़ाज़त और समझ तेरी चौकीदारी करेगी।

12हिकमत तुझे ग़लत राह और कजरौ बातें करनेवाले से बचाए रखेगी।

13ऐसे लोग सीधी राह को छोड़ देते हैं ताकि तारीक रास्तों पर चलें,

14वह बुरी हरकतें करने से ख़ुश हो जाते हैं, ग़लत काम की कजरवी देखकर जशन मनाते हैं।

15उनकी राहें टेढ़ी हैं, और वह जहाँ भी चलें आवारा फिरते हैं।

16हिकमत तुझे नाजायज़ औरत से छुड़ाती है, उस अजनबी औरत से जो चिकनी-चुपड़ी बातें करती,

17जो अपने जीवनसाथी को तर्क करके अपने ख़ुदा का अहद भूल जाती है।

18क्योंकि उसके घर में दाख़िल होने का अंजाम मौत, उस की राहों की मनज़िले-मक़सूद पाताल है।

19जो भी उसके पास जाए वह वापस नहीं आएगा, वह ज़िंदगीबख़्श राहों पर दुबारा नहीं पहुँचेगा।

20चुनाँचे अच्छे लोगों की राह पर चल-फिर, ध्यान दे कि तेरे क़दम रास्तबाज़ों के रास्ते पर रहें।

21क्योंकि सीधी राह पर चलनेवाले मुल्क में आबाद होंगे, आख़िरकार बेइलज़ाम ही उसमें बाक़ी रहेंगे।

22लेकिन बेदीन मुल्क से मिट जाएंगे, और बेवफ़ाओं को उखाड़कर मुल्क से ख़ारिज कर दिया जाएगा।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath