عیسائیت
واپس

अमसाल 17

1जिस घर में रोटी का बासी टुकड़ा सुकून के साथ खाया जाए वह उस घर से कहीं बेहतर है जिसमें लड़ाई-झगड़ा है, ख़ाह उसमें कितनी शानदार ज़ियाफ़त क्यों न हो रही हो।

2समझदार मुलाज़िम मालिक के उस बेटे पर क़ाबू पाएगा जो शर्म का बाइस है, और जब भाइयों में मौरूसी मिलकियत तक़सीम की जाए तो उसे भी हिस्सा मिलेगा।

3सोना-चाँदी कुठाली में पिघलाकर पाक-साफ़ की जाती है, लेकिन रब ही दिल की जाँच-पड़ताल करता है।

4बदकार शरीर होंटों पर ध्यान और धोकेबाज़ तबाहकुन ज़बान पर तवज्जुह देता है।

5जो ग़रीब का मज़ाक़ उड़ाए वह उसके ख़ालिक़ की तहक़ीर करता है, जो दूसरे की मुसीबत देखकर ख़ुश हो जाए वह सज़ा से नहीं बचेगा।

6पोते बूढ़ों का ताज और वालिदैन अपने बच्चों के ज़ेवर हैं।

7अहमक़ के लिए बड़ी बड़ी बातें करना मौज़ूँ नहीं, लेकिन शरीफ़ होंटों पर फ़रेब कहीं ज़्यादा ग़ैरमुनासिब है।

8रिश्वत देनेवाले की नज़र में रिश्वत जादू की मानिंद है। जिस दरवाज़े पर भी खटखटाए वह खुल जाता है।

9जो दूसरे की ग़लती को दरगुज़र करे वह मुहब्बत को फ़रोग़ देता है, लेकिन जो माज़ी की ग़लतियाँ दोहराता रहे वह क़रीबी दोस्तों में निफ़ाक़ पैदा करता है।

10अगर समझदार को डाँटा जाए तो वह ख़ूब सीख लेता है, लेकिन अगर अहमक़ को सौ बार मारा जाए तो भी वह इतना नहीं सीखता।

11शरीर सरकशी पर तुला रहता है, लेकिन उसके ख़िलाफ़ ज़ालिम क़ासिद भेजा जाएगा।

12जो अहमक़ अपनी हमाक़त में उलझा हुआ हो उससे दरेग़ कर, क्योंकि उससे मिलने से बेहतर यह है कि तेरा उस रीछनी से वास्ता पड़े जिसके बच्चे उससे छीन लिए गए हों।

13जो भलाई के एवज़ बुराई करे उसके घर से बुराई कभी दूर नहीं होगी।

14लड़ाई-झगड़ा छेड़ना बंद में रख़ना डालने के बराबर है। इससे पहले कि मुक़दमाबाज़ी शुरू हो उससे बाज़ आ।

15जो बेदीन को बेक़ुसूर और रास्तबाज़ को मुजरिम ठहराए उससे रब घिन खाता है।

16अहमक़ के हाथ में पैसों का क्या फ़ायदा है? क्या वह हिकमत ख़रीद सकता है जबकि उसमें अक़्ल नहीं? हरगिज़ नहीं!

17पड़ोसी वह है जो हर वक़्त मुहब्बत रखता है, भाई वह है जो मुसीबत में सहारा देने के लिए पैदा हुआ है।

18जो हाथ मिलाकर अपने पड़ोसी का ज़ामिन होने का वादा करे वह नासमझ है।

19जो लड़ाई-झगड़े से मुहब्बत रखे वह गुनाह से मुहब्बत रखता है, जो अपना दरवाज़ा हद से ज़्यादा बड़ा बनाए वह तबाही को दाख़िल होने की दावत देता है।

20जिसका दिल टेढ़ा है वह ख़ुशहाली नहीं पाएगा, और जिसकी ज़बान चालाक है वह मुसीबत में उलझ जाएगा।

21जिसके हाँ अहमक़ बेटा पैदा हो जाए उसे दुख पहुँचता है, और अक़्ल से ख़ाली बेटा बाप के लिए ख़ुशी का बाइस नहीं होता।

22ख़ुशबाश दिल पूरे जिस्म को शफ़ा देता है, लेकिन शिकस्ता रूह हड्डियों को ख़ुश्क कर देती है।

23बेदीन चुपके से रिश्वत लेकर इनसाफ़ की राहों को बिगाड़ देता है।

24समझदार अपनी नज़र के सामने हिकमत रखता है, लेकिन अहमक़ की नज़रें दुनिया की इंतहा तक आवारा फिरती हैं।

25अहमक़ बेटा बाप के लिए रंज का बाइस और माँ के लिए तलख़ी का सबब है।

26बेक़ुसूर पर जुरमाना लगाना ग़लत है, और शरीफ़ को उस की दियानतदारी के सबब से कोड़े लगाना बुरा है।

27जो अपनी ज़बान को क़ाबू में रखे वह इल्मो-इरफ़ान का मालिक है, जो ठंडे दिल से बात करे वह समझदार है।

28अगर अहमक़ ख़ामोश रहे तो वह भी दानिशमंद लगता है। जब तक वह बात न करे लोग उसे समझदार क़रार देते हैं।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath