عیسائیت
واپس

अमसाल 16

1इनसान दिल में मनसूबे बाँधता है, लेकिन ज़बान का जवाब रब की तरफ़ से आता है।

2इनसान की नज़र में उस की तमाम राहें पाक-साफ़ हैं, लेकिन रब ही रूहों की जाँच-पड़ताल करता है।

3जो कुछ भी तू करना चाहे उसे रब के सुपुर्द कर। तब ही तेरे मनसूबे कामयाब होंगे।

4रब ने सब कुछ अपने ही मक़ासिद पूरे करने के लिए बनाया है। वह दिन भी पहले से मुक़र्रर है जब बेदीन पर आफ़त आएगी।

5रब हर मग़रूर दिल से घिन खाता है। यक़ीनन वह सज़ा से नहीं बचेगा।

6शफ़क़त और वफ़ादारी गुनाह का कफ़्फ़ारा देती हैं। रब का ख़ौफ़ मानने से इनसान बुराई से दूर रहता है।

7अगर रब किसी इनसान की राहों से ख़ुश हो तो वह उसके दुश्मनों को भी उससे सुलह कराने देता है।

8इनसाफ़ से थोड़ा-बहुत कमाना नाइनसाफ़ी से बहुत दौलत जमा करने से कहीं बेहतर है।

9इनसान अपने दिल में मनसूबे बाँधता रहता है, लेकिन रब ही मुक़र्रर करता है कि वह आख़िरकार किस राह पर चल पड़े।

10बादशाह के होंट गोया इलाही फ़ैसले पेश करते हैं, उसका मुँह अदालत करते वक़्त बेवफ़ा नहीं होता।

11रब दुरुस्त तराज़ू का मालिक है, उसी ने तमाम बाटों का इंतज़ाम क़ायम किया।

12बादशाह बेदीनी से घिन खाता है, क्योंकि उसका तख़्त रास्तबाज़ी की बुनियाद पर मज़बूत रहता है।

13बादशाह रास्तबाज़ होंटों से ख़ुश होता और साफ़ बात करनेवाले से मुहब्बत रखता है।

14बादशाह का ग़ुस्सा मौत का पेशख़ैमा है, लेकिन दानिशमंद उसे ठंडा करने के तरीक़े जानता है।

15जब बादशाह का चेहरा खिल उठे तो मतलब ज़िंदगी है। उस की मंज़ूरी मौसमे-बहार के तरो-ताज़ा करनेवाले बादल की मानिंद है।

16हिकमत का हुसूल सोने से कहीं बेहतर और समझ पाना चाँदी से कहीं बढ़कर है।

17दियानतदार की मज़बूत राह बुरे काम से दूर रहती है, जो अपनी राह की पहरादारी करे वह अपनी जान बचाए रखता है।

18तबाही से पहले ग़ुरूर और गिरने से पहले तकब्बुर आता है।

19फ़रोतनी से ज़रूरतमंदों के दरमियान बसना घमंडियों के लूटे हुए माल में शरीक होने से कहीं बेहतर है।

20जो कलाम पर ध्यान दे वह ख़ुशहाल होगा, मुबारक है वह जो रब पर भरोसा रखे।

21जो दिल से दानिशमंद है उसे समझदार क़रार दिया जाता है, और मीठे अलफ़ाज़ तालीम में इज़ाफ़ा करते हैं।

22फ़हम अपने मालिक के लिए ज़िंदगी का सरचश्मा है, लेकिन अहमक़ की अपनी ही हमाक़त उसे सज़ा देती है।

23दानिशमंद का दिल समझ की बातें ज़बान पर लाता और तालीम देने में होंटों का सहारा बनता है।

24मेहरबान अलफ़ाज़ ख़ालिस शहद हैं, वह जान के लिए शीरीं और पूरे जिस्म को तरो-ताज़ा कर देते हैं।

25ऐसी राह भी होती है जो देखने में तो ठीक लगती है गो उसका अंजाम मौत है।

26मज़दूर का ख़ाली पेट उसे काम करने पर मजबूर करता, उस की भूक उसे हाँकती रहती है।

27शरीर कुरेद कुरेदकर ग़लत काम निकाल लेता, उसके होंटों पर झुलसानेवाली आग रहती है।

28कजरौ आदमी झगड़े छेड़ता रहता, और तोहमत लगानेवाला दिली दोस्तों में भी रख़ना डालता है।

29ज़ालिम अपने पड़ोसी को वरग़लाकर ग़लत राह पर ले जाता है।

30जो आँख मारे वह ग़लत मनसूबे बाँध रहा है, जो अपने होंट चबाए वह ग़लत काम करने पर तुला हुआ है।

31सफ़ेद बाल एक शानदार ताज हैं जो रास्तबाज़ ज़िंदगी गुज़ारने से हासिल होते हैं।

32तहम्मुल करनेवाला सूरमे से सबक़त लेता है, जो अपने आपको क़ाबू में रखे वह शहर को शिकस्त देनेवाले से बरतर है।

33इनसान तो क़ुरा डालता है, लेकिन उसका हर फ़ैसला रब की तरफ़ से है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath