عیسائیت
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अमसाल 15

1नरम जवाब ग़ुस्सा ठंडा करता, लेकिन तुरश बात तैश दिलाती है।

2दानिशमंदों की ज़बान इल्मो-इरफ़ान फैलाती है जबकि अहमक़ का मुँह हमाक़त का ज़ोर से उबलनेवाला चश्मा है।

3रब की आँखें हर जगह मौजूद हैं, वह बुरे और भले सब पर ध्यान देती हैं।

4नरम ज़बान ज़िंदगी का दरख़्त है जबकि फ़रेबदेह ज़बान शिकस्तादिल कर देती है।

5अहमक़ अपने बाप की तरबियत को हक़ीर जानता है, लेकिन जो नसीहत माने वह दानिशमंद है।

6रास्तबाज़ के घर में बड़ा ख़ज़ाना होता है, लेकिन जो कुछ बेदीन हासिल करता है वह तबाही का बाइस है।

7दानिशमंदों के होंट इल्मो-इरफ़ान का बीज बिखेर देते हैं, लेकिन अहमक़ों का दिल ऐसा नहीं करता।

8रब बेदीनों की क़ुरबानी से घिन खाता, लेकिन सीधी राह पर चलनेवालों की दुआ से ख़ुश होता है।

9रब बेदीन की राह से घिन खाता, लेकिन रास्ती का पीछा करनेवाले से प्यार करता है।

10जो सहीह राह को तर्क करे उस की सख़्त तादीब की जाएगी, जो नसीहत से नफ़रत करे वह मर जाएगा।

11पाताल और आलमे-अरवाह रब को साफ़ नज़र आते हैं। तो फिर इनसानों के दिल उसे क्यों न साफ़ दिखाई दें?

12तानाज़न को दूसरों की नसीहत पसंद नहीं आती, इसलिए वह दानिशमंदों के पास नहीं जाता।

13जिसका दिल ख़ुश है उसका चेहरा खुला रहता है, लेकिन जिसका दिल परेशान है उस की रूह शिकस्ता रहती है।

14समझदार का दिल इल्मो-इरफ़ान की तलाश में रहता, लेकिन अहमक़ हमाक़त की चरागाह में चरता रहता है।

15मुसीबतज़दा के तमाम दिन बुरे हैं, लेकिन जिसका दिल ख़ुश है वह रोज़ाना जशन मनाता है।

16जो ग़रीब रब का ख़ौफ़ मानता है उसका हाल उस करोड़पति से कहीं बेहतर है जो बड़ी बेचैनी से ज़िंदगी गुज़ारता है।

17जहाँ मुहब्बत है वहाँ सब्ज़ी का सालन बहुत है, जहाँ नफ़रत है वहाँ मोटे-ताज़े बछड़े की ज़ियाफ़त भी बेफ़ायदा है।

18ग़ुसीला आदमी झगड़े छेड़ता रहता जबकि तहम्मुल करनेवाला लोगों के ग़ुस्से को ठंडा कर देता है।

19काहिल का रास्ता काँटेदार बाड़ की मानिंद है, लेकिन दियानतदारों की राह पक्की सड़क ही है।

20दानिशमंद बेटा अपने बाप के लिए ख़ुशी का बाइस है, लेकिन अहमक़ अपनी माँ को हक़ीर जानता है।

21नासमझ आदमी हमाक़त से लुत्फ़अंदोज़ होता, लेकिन समझदार आदमी सीधी राह पर चलता है।

22जहाँ सलाह-मशवरा नहीं होता वहाँ मनसूबे नाकाम रह जाते हैं, जहाँ बहुत-से मुशीर होते हैं वहाँ कामयाबी होती है।

23इनसान मौज़ूँ जवाब देने से ख़ुश हो जाता है, वक़्त पर मुनासिब बात कितनी अच्छी होती है।

24ज़िंदगी की राह चढ़ती रहती है ताकि समझदार उस पर चलते हुए पाताल में उतरने से बच जाए।

25रब मुतकब्बिर का घर ढा देता, लेकिन बेवा की ज़मीन की हुदूद महफ़ूज़ रखता है।

26रब बुरे मनसूबों से घिन खाता है, और मेहरबान अलफ़ाज़ उसके नज़दीक पाक हैं।

27जो नाजायज़ नफ़ा कमाए वह अपने घर पर आफ़त लाता है, लेकिन जो रिश्वत से नफ़रत रखे वह जीता रहेगा।

28रास्तबाज़ का दिल सोच-समझकर जवाब देता है, लेकिन बेदीन का मुँह ज़ोर से उबलनेवाला चश्मा है जिससे बुरी बातें निकलती रहती हैं।

29रब बेदीनों से दूर रहता, लेकिन रास्तबाज़ की दुआ सुनता है।

30चमकती आँखें दिल को ख़ुशी दिलाती हैं, अच्छी ख़बर पूरे जिस्म को तरो-ताज़ा कर देती है।

31जो ज़िंदगीबख़्श नसीहत पर ध्यान दे वह दानिशमंदों के दरमियान ही सुकूनत करेगा।

32जो तरबियत की परवा न करे वह अपने आपको हक़ीर जानता है, लेकिन जो नसीहत पर ध्यान दे उस की समझ में इज़ाफ़ा होता है।

33रब का ख़ौफ़ ही वह तरबियत है जिससे इनसान हिकमत सीखता है। पहले फ़रोतनी अपना ले, क्योंकि यही इज़्ज़त पाने का पहला क़दम है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath