عیسائیت
واپس

गिनती 15

1रब ने मूसा से कहा,

2“इसराईलियों को बताना कि जब तुम उस मुल्क में दाख़िल होगे जो मैं तुम्हें दूँगा

3तो जलनेवाली क़ुरबानियाँ यों पेश करना : अगर तुम अपने गाय-बैलों या भेड़-बकरियों में से ऐसी क़ुरबानी पेश करना चाहो जिसकी ख़ुशबू रब को पसंद हो तो साथ साथ डेढ़ किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी पेश करो जो एक लिटर ज़ैतून के तेल के साथ मिलाया गया हो। इसमें कोई फ़रक़ नहीं कि यह भस्म होनेवाली क़ुरबानी, मन्नत की क़ुरबानी, दिली ख़ुशी की क़ुरबानी या किसी ईद की क़ुरबानी हो।

5हर भेड़ को पेश करते वक़्त एक लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश करना।

6जब मेंढा क़ुरबान किया जाए तो 3 किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी साथ पेश करना जो सवा लिटर तेल के साथ मिलाया गया हो।

7सवा लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश की जाए। ऐसी क़ुरबानी की ख़ुशबू रब को पसंद आएगी।

8अगर तू रब को भस्म होनेवाली क़ुरबानी, मन्नत की क़ुरबानी या सलामती की क़ुरबानी के तौर पर जवान बैल पेश करना चाहे

9तो उसके साथ साढ़े 4 किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी पेश करना जो दो लिटर तेल के साथ मिलाया गया हो।

10दो लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश की जाए। ऐसी क़ुरबानी की ख़ुशबू रब को पसंद है।

11लाज़िम है कि जब भी किसी गाय, बैल, भेड़, मेंढे, बकरी या बकरे को चढ़ाया जाए तो ऐसा ही किया जाए।

12अगर एक से ज़ायद जानवरों को क़ुरबान करना है तो हर एक के लिए मुक़र्ररा ग़ल्ला और मै की नज़रें भी साथ ही पेश की जाएँ।

13लाज़िम है कि हर देसी इसराईली जलनेवाली क़ुरबानियाँ पेश करते वक़्त ऐसा ही करे। फिर उनकी ख़ुशबू रब को पसंद आएगी।

14यह भी लाज़िम है कि इसराईल में आरिज़ी या मुस्तक़िल तौर पर रहनेवाले परदेसी इन उसूलों के मुताबिक़ अपनी क़ुरबानियाँ चढ़ाएँ। फिर उनकी ख़ुशबू रब को पसंद आएगी।

15मुल्के-कनान में रहनेवाले तमाम लोगों के लिए पाबंदियाँ एक जैसी हैं, ख़ाह वह देसी हों या परदेसी, क्योंकि रब की नज़र में परदेसी तुम्हारे बराबर है। यह तुम्हारे और तुम्हारी औलाद के लिए दायमी उसूल है।

16तुम्हारे और तुम्हारे साथ रहनेवाले परदेसी के लिए एक ही शरीअत है।”

17रब ने मूसा से कहा,

18“इसराईलियों को बताना कि जब तुम उस मुल्क में दाख़िल होगे जिसमें मैं तुम्हें ले जा रहा हूँ

19और वहाँ की पैदावार खाओगे तो पहले उसका एक हिस्सा उठानेवाली क़ुरबानी के तौर पर रब को पेश करना।

20फ़सल के पहले ख़ालिस आटे में से मेरे लिए एक रोटी बनाकर उठानेवाली क़ुरबानी के तौर पर पेश करो। वह गाहने की जगह की तरफ़ से रब के लिए उठानेवाली क़ुरबानी होगी।

21अपनी फ़सल के पहले ख़ालिस आटे में से यह क़ुरबानी पेश किया करो। यह उसूल हमेशा तक लागू रहे।

22हो सकता है कि ग़ैरइरादी तौर पर तुमसे ग़लती हुई है और तुमने उन अहकाम पर पूरे तौर पर अमल नहीं किया जो रब मूसा को दे चुका है

23या जो वह आनेवाली नसलों को देगा।

24अगर जमात इस बात से नावाक़िफ़ थी और ग़ैरइरादी तौर पर उससे ग़लती हुई तो फिर पूरी जमात एक जवान बैल भस्म होनेवाली क़ुरबानी के तौर पर पेश करे। साथ ही वह मुक़र्ररा ग़ल्ला और मै की नज़रें भी पेश करे। इसकी ख़ुशबू रब को पसंद होगी। इसके अलावा जमात गुनाह की क़ुरबानी के लिए एक बकरा पेश करे।

25इमाम इसराईल की पूरी जमात का कफ़्फ़ारा दे तो उन्हें मुआफ़ी मिलेगी, क्योंकि उनका गुनाह ग़ैरइरादी था और उन्होंने रब को भस्म होनेवाली क़ुरबानी और गुनाह की क़ुरबानी पेश की है।

26इसराईलियों की पूरी जमात को परदेसियों समेत मुआफ़ी मिलेगी, क्योंकि गुनाह ग़ैरइरादी था।

27अगर सिर्फ़ एक शख़्स से ग़ैरइरादी तौर पर गुनाह हुआ हो तो गुनाह की क़ुरबानी के लिए वह एक यकसाला बकरी पेश करे।

28इमाम रब के सामने उस शख़्स का कफ़्फ़ारा दे। जब कफ़्फ़ारा दे दिया गया तो उसे मुआफ़ी हासिल होगी।

29यही उसूल परदेसी पर भी लागू है। अगर उससे ग़ैरइरादी तौर पर गुनाह हुआ हो तो वह मुआफ़ी हासिल करने के लिए वही कुछ करे जो इसराईली को करना होता है।

30लेकिन अगर कोई देसी या परदेसी जान-बूझकर गुनाह करता है तो ऐसा शख़्स रब की इहानत करता है, इसलिए लाज़िम है कि उसे उस की क़ौम में से मिटाया जाए।

31उसने रब का कलाम हक़ीर जानकर उसके अहकाम तोड़ डाले हैं, इसलिए उसे ज़रूर क़ौम में से मिटाया जाए। वह अपने गुनाह का ज़िम्मादार है।”

32जब इसराईली रेगिस्तान में से गुज़र रहे थे तो एक आदमी को पकड़ा गया जो हफ़ते के दिन लकड़ियाँ जमा कर रहा था।

33जिन्होंने उसे पकड़ा था वह उसे मूसा, हारून और पूरी जमात के पास ले आए।

34चूँकि साफ़ मालूम नहीं था कि उसके साथ क्या किया जाए इसलिए उन्होंने उसे गिरिफ़्तार कर लिया।

35फिर रब ने मूसा से कहा, “इस आदमी को ज़रूर सज़ाए-मौत दी जाए। पूरी जमात उसे ख़ैमागाह के बाहर ले जाकर संगसार करे।”

36चुनाँचे जमात ने उसे ख़ैमागाह के बाहर ले जाकर संगसार किया, जिस तरह रब ने मूसा को हुक्म दिया था।

37रब ने मूसा से कहा,

38“इसराईलियों को बताना कि तुम और तुम्हारे बाद की नसलें अपने लिबास के किनारों पर फुँदने लगाएँ। हर फुँदना एक क़िरमिज़ी डोरी से लिबास के साथ लगा हो।

39इन फुँदनों को देखकर तुम्हें रब के तमाम अहकाम याद रहेंगे और तुम उन पर अमल करोगे। फिर तुम अपने दिलों और आँखों की ग़लत ख़ाहिशों के पीछे नहीं पड़ोगे बल्कि ज़िनाकारी से दूर रहोगे।

40फिर तुम मेरे अहकाम को याद करके उन पर अमल करोगे और अपने ख़ुदा के सामने मख़सूसो-मुक़द्दस रहोगे।

41मैं रब तुम्हारा ख़ुदा हूँ जो तुम्हें मिसर से निकाल लाया ताकि तुम्हारा ख़ुदा हूँ। मैं रब तुम्हारा ख़ुदा हूँ।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath