عیسائیت
واپس

गिनती 12

1एक दिन मरियम और हारून मूसा के ख़िलाफ़ बातें करने लगे। वजह यह थी कि उसने कूश की एक औरत से शादी की थी।

2उन्होंने पूछा, “क्या रब सिर्फ़ मूसा की मारिफ़त बात करता है? क्या उसने हमसे भी बात नहीं की?” रब ने उनकी यह बातें सुनीं।

3लेकिन मूसा निहायत हलीम था। दुनिया में उस जैसा हलीम कोई नहीं था।

4अचानक रब मूसा, हारून और मरियम से मुख़ातिब हुआ, “तुम तीनों बाहर निकलकर मुलाक़ात के ख़ैमे के पास आओ।” तीनों वहाँ पहुँचे।

5तब रब बादल के सतून में उतरकर मुलाक़ात के ख़ैमे के दरवाज़े पर खड़ा हुआ। उसने हारून और मरियम को बुलाया तो दोनों आए।

6उसने कहा, “मेरी बात सुनो। जब तुम्हारे दरमियान नबी होता है तो मैं अपने आपको रोया में उस पर ज़ाहिर करता हूँ या ख़ाब में उससे मुख़ातिब होता हूँ।

7लेकिन मेरे ख़ादिम मूसा की और बात है। उसे मैंने अपने पूरे घराने पर मुक़र्रर किया है।

8उससे मैं रूबरू हमकलाम होता हूँ। उससे मैं मुअम्मों के ज़रीए नहीं बल्कि साफ़ साफ़ बात करता हूँ। वह रब की सूरत देखता है। तो फिर तुम मेरे ख़ादिम के ख़िलाफ़ बातें करने से क्यों न डरे?”

9रब का ग़ज़ब उन पर आन पड़ा, और वह चला गया।

10जब बादल का सतून ख़ैमे से दूर हुआ तो मरियम की जिल्द बर्फ़ की मानिंद सफ़ेद थी। वह कोढ़ का शिकार हो गई थी। हारून उस की तरफ़ मुड़ा तो उस की हालत देखी

11और मूसा से कहा, “मेरे आक़ा, मेहरबानी करके हमें इस गुनाह की सज़ा न दें जो हमारी हमाक़त के बाइस सरज़द हुआ है।

12मरियम को इस हालत में न छोड़ें। वह तो ऐसे बच्चे की मानिंद है जो मुरदा पैदा हुआ हो, जिसके जिस्म का आधा हिस्सा गल चुका हो।”

13तब मूसा ने पुकारकर रब से कहा, “ऐ अल्लाह, मेहरबानी करके उसे शफ़ा दे।”

14रब ने जवाब में मूसा से कहा, “अगर मरियम का बाप उसके मुँह पर थूकता तो क्या वह पूरे हफ़ते तक शर्म महसूस न करती? उसे एक हफ़ते के लिए ख़ैमागाह के बाहर बंद रख। इसके बाद उसे वापस लाया जा सकता है।”

15चुनाँचे मरियम को एक हफ़ते के लिए ख़ैमागाह के बाहर बंद रखा गया। लोग उस वक़्त तक सफ़र के लिए रवाना न हुए जब तक उसे वापस न लाया गया।

16जब वह वापस आई तो इसराईली हसीरात से रवाना होकर फ़ारान के रेगिस्तान में ख़ैमाज़न हुए।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath