عیسائیت
واپس

मलाकी 2

1ऐ इमामो, अब मेरे फ़ैसले पर ध्यान दो!”

2रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “मेरी सुनो, पूरे दिल से मेरे नाम का एहतराम करो, वरना मैं तुम पर लानत भेजूँगा, मैं तुम्हारी बरकतों को लानतों में तबदील कर दूँगा। बल्कि मैं यह कर भी चुका हूँ, क्योंकि तुमने पूरे दिल से मेरे नाम का एहतराम नहीं किया।

3तुम्हारे चाल-चलन के सबब से मैं तुम्हारी औलाद को डाँटूँगा। मैं तुम्हारी ईद की क़ुरबानियों का गोबर तुम्हारे मुँह पर फेंक दूँगा, और तुम्हें उसके समेत बाहर फेंका जाएगा।”

4रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “तब तुम जान लोगे कि मैंने तुम पर यह फ़ैसला किया है ताकि मेरा लावी के क़बीले के साथ अहद क़ायम रहे।

5क्योंकि मैंने अहद बाँधकर लावियों से ज़िंदगी और सलामती का वादा किया था, और मैंने वादे को पूरा भी किया। उस वक़्त लावी मेरा ख़ौफ़ मानते बल्कि मेरे नाम से दहशत खाते थे।

6वह क़ाबिले-एतमाद तालीम देते थे, और उनकी ज़बान पर झूट नहीं होता था। वह सलामती से और सीधी राह पर मेरे साथ चलते थे, और बहुत-से लोग उनके बाइस गुनाह से दूर हो गए।

7इमामों का फ़र्ज़ है कि वह सहीह तालीम महफ़ूज़ रखें, और लोगों को उनसे हिदायत हासिल करनी चाहिए। क्योंकि इमाम रब्बुल-अफ़वाज का पैग़ंबर है।

8लेकिन तुम सहीह राह से हट गए हो। तुम्हारी तालीम बहुतों के लिए ठोकर का बाइस बन गई है।” रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “तुमने लावियों के साथ मेरे अहद को ख़ाक में मिला दिया है।

9इसलिए मैंने तुम्हें तमाम क़ौम के सामने ज़लील कर दिया है, सब तुम्हें हक़ीर जानते हैं। क्योंकि तुम मेरी राहों पर नहीं रहते बल्कि तालीम देते वक़्त जानिबदारी दिखाते हो।”

10क्या हम सबका एक ही बाप नहीं? एक ही ख़ुदा ने हमें ख़लक़ किया है। तो फिर हम एक दूसरे से बेवफ़ाई करके अपने बापदादा के अहद की बेहुरमती क्यों कर रहे हैं?

11यहूदाह बेवफ़ा हो गया है। इसराईल और यरूशलम में मकरूह हरकतें सरज़द हुई हैं, क्योंकि यहूदाह के आदमियों ने रब के घर की बेहुरमती की है, उस मक़दिस की जो रब को प्यारा है। किस तरह? उन्होंने दीगर अक़वाम की बुतपरस्त औरतों से शादी की है।

12लेकिन जिसने भी ऐसा किया है उसे रब जड़ से याक़ूब के ख़ैमों से निकाल फेंकेगा, ख़ाह वह रब्बुल-अफ़वाज को कितनी क़ुरबानियाँ पेश क्यों न करे।

13तुमसे एक और ख़ता भी सरज़द होती है। बेशक रब की क़ुरबानगाह को अपने आँसुओं से तर करो, बेशक रोते और कराहते रहो कि रब न हमारी क़ुरबानियों पर तवज्जुह देता, न उन्हें ख़ुशी से हमारे हाथ से क़बूल करता है। लेकिन यह करने से कोई फ़रक़ नहीं पड़ेगा।

14तुम पूछते हो, “क्यों?” इसलिए कि शादी करते वक़्त रब ख़ुद गवाह होता है। और अब तू अपनी बीवी से बेवफ़ा हो गया है, गो वह तेरी जीवनसाथी है जिससे तूने शादी का अहद बाँधा था।

15क्या रब ने शौहर और बीवी को एक नहीं बनाया, एक जिस्म जिसमें रूह है? और यह एक जिस्म क्या चाहता है? अल्लाह की तरफ़ से औलाद। चुनाँचे अपनी रूह में ख़बरदार रहो! अपनी बीवी से बेवफ़ा न हो जा!

16क्योंकि रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “मैं तलाक़ से नफ़रत करता हूँ और उससे मुतनफ़्फ़िर हूँ जो ज़ुल्म से मुलब्बस होता है। चुनाँचे अपनी रूह में ख़बरदार रहकर इस तरह का बेवफ़ा रवैया इख़्तियार न करो!”

17तुम्हारी बातों को सुन सुनकर रब थक गया है। तुम पूछते हो, “हमने उसे किस तरह थका दिया है?” इसमें कि तुम दावा करते हो, “बदी करनेवाला रब की नज़र में ठीक है, वह ऐसे लोगों को पसंद करता है।” तुम यह भी कहते हो, “अल्लाह कहाँ है? वह इनसाफ़ क्यों नहीं करता?”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath