عیسائیت
واپس

अहबार 1

1रब ने मुलाक़ात के ख़ैमे में से मूसा को बुलाकर कहा

2कि इसराईलियों को इत्तला दे, “अगर तुममें से कोई रब को क़ुरबानी पेश करना चाहे तो वह अपने गाय-बैलों या भेड़-बकरियों में से जानवर चुन ले।

3अगर वह अपने गाय-बैलों में से भस्म होनेवाली क़ुरबानी चढ़ाना चाहे तो वह बेऐब बैल चुनकर उसे मुलाक़ात के ख़ैमे के दरवाज़े पर पेश करे ताकि रब उसे क़बूल करे।

4क़ुरबानी पेश करनेवाला अपना हाथ जानवर के सर पर रखे तो यह क़ुरबानी मक़बूल होकर उसका कफ़्फ़ारा देगी।

5क़ुरबानी पेश करनेवाला बैल को वहाँ रब के सामने ज़बह करे। फिर हारून के बेटे जो इमाम हैं उसका ख़ून रब को पेश करके उसे दरवाज़े पर की क़ुरबानगाह के चार पहलुओं पर छिड़कें।

6इसके बाद क़ुरबानी पेश करनेवाला खाल उतारकर जानवर के टुकड़े टुकड़े करे।

7इमाम क़ुरबानगाह पर आग लगाकर उस पर तरतीब से लकड़ियाँ चुनें।

8उस पर वह जानवर के टुकड़े सर और चरबी समेत रखें।

9लाज़िम है कि क़ुरबानी पेश करनेवाला पहले जानवर की अंतड़ियाँ और पिंडलियाँ धोए, फिर इमाम पूरे जानवर को क़ुरबानगाह पर जला दे। इस जलनेवाली क़ुरबानी की ख़ुशबू रब को पसंद है।

10अगर भस्म होनेवाली क़ुरबानी भेड़-बकरियों में से चुनी जाए तो वह बेऐब नर हो।

11पेश करनेवाला उसे रब के सामने क़ुरबानगाह की शिमाली सिम्त में ज़बह करे। फिर हारून के बेटे जो इमाम हैं उसका ख़ून क़ुरबानगाह के चार पहलुओं पर छिड़कें।

12इसके बाद पेश करनेवाला जानवर के टुकड़े टुकड़े करे और इमाम यह टुकड़े सर और चरबी समेत क़ुरबानगाह की जलती हुई लकड़ियों पर तरतीब से रखे।

13लाज़िम है कि क़ुरबानी पेश करनेवाला पहले जानवर की अंतड़ियाँ और पिंडलियाँ धोए, फिर इमाम पूरे जानवर को रब को पेश करके क़ुरबानगाह पर जला दे। इस जलनेवाली क़ुरबानी की ख़ुशबू रब को पसंद है।

14अगर भस्म होनेवाली क़ुरबानी परिंदा हो तो वह क़ुम्री या जवान कबूतर हो।

15इमाम उसे क़ुरबानगाह के पास ले आए और उसका सर मरोड़कर क़ुरबानगाह पर जला दे। वह उसका ख़ून यों निकलने दे कि वह क़ुरबानगाह की एक तरफ़ से नीचे टपके।

16वह उसका पोटा और जो उसमें है दूर करके क़ुरबानगाह की मशरिक़ी सिम्त में फेंक दे, वहाँ जहाँ राख फेंकी जाती है।

17उसे पेश करते वक़्त इमाम उसके पर पकड़कर परिंदे को फाड़ डाले, लेकिन यों कि वह बिलकुल टुकड़े टुकड़े न हो जाए। फिर इमाम उसे क़ुरबानगाह पर जलती हुई लकड़ियों पर जला दे। इस जलनेवाली क़ुरबानी की ख़ुशबू रब को पसंद है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath