नोहा 4
1हाय, सोने की आबो-ताब न रही, ख़ालिस सोना भी माँद पड़ गया है। मक़दिस के जवाहर तमाम गलियों में बिखरे पड़े हैं।
2पहले तो सिय्यून के गिराँक़दर फ़रज़ंद ख़ालिस सोने जैसे क़ीमती थे, लेकिन अब वह गोया मिट्टी के बरतन समझे जाते हैं जो आम कुम्हार ने बनाए हैं।
3गो गीदड़ भी अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं, लेकिन मेरी क़ौम रेगिस्तान में रहनेवाले उक़ाबी उल्लू जैसी ज़ालिम हो गई है।
4शीरख़ार बच्चे की ज़बान प्यास के मारे तालू से चिपक गई है। छोटे बच्चे भूक के मारे रोटी माँगते हैं, लेकिन खिलानेवाला कोई नहीं है।
5जो पहले लज़ीज़ खाना खाते थे वह अब गलियों में तबाह हो रहे हैं। जो पहले अरग़वानी रंग के शानदार कपड़े पहनते थे वह अब कूड़े-करकट में लोट-पोट हो रहे हैं।
6मेरी क़ौम से सदूम की निसबत कहीं ज़्यादा संगीन गुनाह सरज़द हुआ है। और सदूम का क़ुसूर इतना संगीन था कि वह एक ही लमहे में तबाह हुआ। किसी ने भी मुदाख़लत न की।
7सिय्यून के रईस कितने शानदार थे! जिल्द बर्फ़ जैसी निखरी, दूध जैसी सफ़ेद थी। रुख़सार मूँगे की तरह गुलाबी, शक्लो-सूरत संगे-लाजवर्द जैसी चमकदार थी।
8लेकिन अब वह कोयले जैसे काले नज़र आते हैं। जब गलियों में घूमते हैं तो उन्हें पहचाना नहीं जाता। उनकी हड्डियों पर की जिल्द सुकड़कर लकड़ी की तरह सूखी हुई है।
9जो तलवार से हलाक हुए उनका हाल उनसे बेहतर था जो भूके मर गए। क्योंकि खेतों से ख़ुराक न मिलने पर वह घुल घुलकर मर गए।
10जब मेरी क़ौम तबाह हुई तो इतना सख़्त काल पड़ गया कि नरमदिल माओं ने भी अपने बच्चों को पकाकर खा लिया।
11रब ने अपना पूरा ग़ज़ब सिय्यून पर नाज़िल किया, उसे अपने शदीद क़हर का निशाना बनाया। उसने यरूशलम में इतनी ज़बरदस्त आग लगाई कि वह बुनियादों तक भस्म हो गया।
12अब दुश्मन यरूशलम के दरवाज़ों में दाख़िल हुए हैं, हालाँकि दुनिया के तमाम बादशाह बल्कि सब लोग समझते थे कि यह मुमकिन ही नहीं।
13लेकिन यह सब कुछ उसके नबियों और इमामों के सबब से हुआ जिन्होंने शहर ही में रास्तबाज़ों की ख़ूनरेज़ी की।
14अब यही लोग अंधों की तरह गलियों में टटोल टटोलकर फिरते हैं। वह ख़ून से इतने आलूदा हैं कि सब लोग उनके कपड़ों से लगने से गुरेज़ करते हैं।
15उन्हें देखकर लोग गरजते हैं, “हटो, तुम नापाक हो! भाग जाओ, दफ़ा हो जाओ, हमें हाथ मत लगाना!” फिर जब वह दीगर अक़वाम में जाकर इधर-उधर फिरने लगते हैं तो वहाँ के लोग भी कहते हैं कि यह मज़ीद यहाँ न ठहरें।
16रब ने ख़ुद उन्हें मुंतशिर कर दिया, अब से वह उनका ख़याल नहीं करेगा। अब न इमामों की इज़्ज़त होती है, न बुज़ुर्गों पर मेहरबानी की जाती है।
17हम चारों तरफ़ आँख दौड़ाते रहे, लेकिन बेफ़ायदा, कोई मदद न मिली। देखते देखते हमारी नज़र धुँधला गई। क्योंकि हम अपने बुर्जों पर खड़े एक ऐसी क़ौम के इंतज़ार में रहे जो हमारी मदद कर ही नहीं सकती थी।
18हम अपने चौकों में जा न सके, क्योंकि वहाँ दुश्मन हमारी ताक में बैठा था। हमारा ख़ातमा क़रीब आया, हमारा मुक़र्ररा वक़्त इख़्तितामपज़ीर हुआ, हमारा अंजाम आ पहुँचा।
19जिस तरह आसमान पर मँडलानेवाला उक़ाब एकदम शिकार पर झपट पड़ता है उसी तरह हमारा ताक़्क़ुब करनेवाले हम पर टूट पड़े, और वह भी कहीं ज़्यादा तेज़ी से। वह पहाड़ों पर हमारे पीछे पीछे भागे और रेगिस्तान में हमारी घात में रहे।
20हमारा बादशाह भी उनके गढ़ों में फँस गया। जो हमारी जान था और जिसे रब ने मसह करके चुन लिया था उसे भी पकड़ लिया गया, गो हमने सोचा था कि उसके साये में बसकर अक़वाम के दरमियान महफ़ूज़ रहेंगे।
21ऐ अदोम बेटी, बेशक शादियाना बजा! बेशक मुल्के-ऊज़ में रहकर ख़ुशी मना! लेकिन ख़बरदार, अल्लाह के ग़ज़ब का प्याला तुझे भी पिलाया जाएगा। तब तू उसे पी पीकर मस्त हो जाएगी और नशे में अपने कपड़े उतारकर बरहना फिरेगी।
22ऐ सिय्यून बेटी, तेरी सज़ा का वक़्त पूरा हो गया है। अब से रब तुझे क़ैदी बनाकर जिलावतन नहीं करेगा। लेकिन ऐ अदोम बेटी, वह तुझे तेरे क़ुसूर का पूरा अज्र देगा, वह तेरे गुनाहों पर से परदा उठा लेगा।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath