عیسائیت
واپس

अय्यूब 26

1अय्यूब ने जवाब देकर कहा,

2“वाह जी वाह! तूने क्या ख़ूब उसे सहारा दिया जो बेबस है, क्या ख़ूब उस बाज़ू को मज़बूत कर दिया जो बेताक़त है!

3तूने उसे कितने अच्छे मशवरे दिए जो हिकमत से महरूम है, अपनी समझ की कितनी गहरी बातें उस पर ज़ाहिर की हैं।

4तूने किसकी मदद से यह कुछ पेश किया है? किसने तेरी रूह में वह बातें डालीं जो तेरे मुँह से निकल आई हैं?

5अल्लाह के सामने वह तमाम मुरदा अरवाह जो पानी और उसमें रहनेवालों के नीचे बसती हैं डर के मारे तड़प उठती हैं।

6हाँ, उसके सामने पाताल बरहना और उस की गहराइयाँ बेनिक़ाब हैं।

7अल्लाह ही ने शिमाल को वीरानो-सुनसान जगह के ऊपर तान लिया, उसी ने ज़मीन को यों लगा दिया कि वह किसी चीज़ से लटकी हुई नहीं है।

8उसने अपने बादलों में पानी लपेट लिया, लेकिन वह बोझ तले न फटे।

9उसने अपना तख़्त नज़रों से छुपाकर अपना बादल उस पर छा जाने दिया।

10उसने पानी की सतह पर दायरा बनाया जो रौशनी और अंधेरे के दरमियान हद बन गया।

11आसमान के सतून लरज़ उठे। उस की धमकी पर वह दहशतज़दा हुए।

12अपनी क़ुदरत से अल्लाह ने समुंदर को थमा दिया, अपनी हिकमत से रहब अज़दहे को टुकड़े टुकड़े कर दिया।

13उसके रूह ने आसमान को साफ़ किया, उसके हाथ ने फ़रार होनेवाले साँप को छेद डाला।

14लेकिन ऐसे काम उस की राहों के किनारे पर ही किए जाते हैं। जो कुछ हम उसके बारे में सुनते हैं वह धीमी धीमी आवाज़ से हमारे कान तक पहुँचता है। तो फिर कौन उस की क़ुदरत की कड़कती आवाज़ समझ सकता है?”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath