عیسائیت
واپس

अय्यूब 12

1अय्यूब ने जवाब देकर कहा,

2“लगता है कि तुम ही वाहिद दानिशमंद हो, कि हिकमत तुम्हारे साथ ही मर जाएगी।

3लेकिन मुझे समझ है, इस नाते से मैं तुमसे अदना नहीं हूँ। वैसे भी कौन ऐसी बातें नहीं जानता?

4मैं तो अपने दोस्तों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गया हूँ, मैं जिसकी दुआएँ अल्लाह सुनता था। हाँ, मैं जो बेगुनाह और बेइलज़ाम हूँ दूसरों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गया हूँ!

5जो सुकून से ज़िंदगी गुज़ारता है वह मुसीबतज़दा को हक़ीर जानता है। वह कहता है, ‘आओ, हम उसे ठोकर मारें जिसके पाँव डगमगाने लगे हैं।’

6ग़ारतगरों के ख़ैमों में आरामो-सुकून है, और अल्लाह को तैश दिलानेवाले हिफ़ाज़त से रहते हैं, गो वह अल्लाह के हाथ में हैं।

7ताहम तुम कहते हो कि जानवरों से पूछ ले तो वह तुझे सहीह बात सिखाएँगे। परिंदों से पता कर तो वह तुझे दुरुस्त जवाब देंगे।

8ज़मीन से बात कर तो वह तुझे तालीम देगी, बल्कि समुंदर की मछलियाँ भी तुझे इसका मफ़हूम सुनाएँगी।

9इनमें से एक भी नहीं जो न जानता हो कि रब के हाथ ने यह सब कुछ किया है।

10उसी के हाथ में हर जानदार की जान, तमाम इनसानों का दम है।

11कान तो अलफ़ाज़ की यों जाँच-पड़ताल करता है जिस तरह ज़बान खानों में इम्तियाज़ करती है।

12और हिकमत उनमें पाई जाती है जो उम्ररसीदा हैं, समझ मुतअद्दिद दिन गुज़रने के बाद ही आती है।

13हिकमत और क़ुदरत अल्लाह की है, वही मसलहत और समझ का मालिक है।

14जो कुछ वह ढा दे वह दुबारा तामीर नहीं होगा, जिसे वह गिरिफ़्तार करे उसे आज़ाद नहीं किया जाएगा।

15जब वह पानी रोके तो काल पड़ता है, जब उसे खुला छोड़े तो वह मुल्क में तबाही मचा देता है।

16उसके पास क़ुव्वत और दानाई है। भटकने और भटकानेवाला दोनों ही उसके हाथ में हैं।

17मुशीरों को वह नंगे पाँव अपने साथ ले जाता है, क़ाज़ियों को अहमक़ साबित करता है।

18वह बादशाहों का पटका खोलकर उनकी कमरों में रस्सा बाँधता है।

19इमामों को वह नंगे पाँव अपने साथ ले जाता है, मज़बूती से खड़े आदमियों को तबाह करता है।

20क़ाबिले-एतमाद अफ़राद से वह बोलने की क़ाबिलियत और बुज़ुर्गों से इम्तियाज़ करने की लियाक़त छीन लेता है।

21वह शुरफ़ा पर अपनी हिक़ारत का इज़हार करके ज़ोरावरों का पटका खोल देता है।

22वह अंधेरे के पोशीदा भेद खोल देता और गहरी तारीकी को रौशनी में लाता है।

23वह क़ौमों को बड़ा भी बनाता और तबाह भी करता है, उम्मतों को मुंतशिर भी करता और उनकी क़ियादत भी करता है।

24वह मुल्क के राहनुमाओं को अक़्ल से महरूम करके उन्हें ऐसे बयाबान में आवारा फिरने देता है जहाँ रास्ता ही नहीं।

25तब वह अंधेरे में रौशनी के बग़ैर टटोल टटोलकर घूमते हैं। अल्लाह ही उन्हें नशे में धुत शराबियों की तरह भटकने देता है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath