عیسائیت
واپس

यरमियाह 25

1यहूयक़ीम बिन यूसियाह की हुकूमत के चौथे साल में अल्लाह का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ। उसी साल बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र तख़्तनशीन हुआ था। यह कलाम यहूदाह के तमाम बाशिंदों के बारे में था।

2चुनाँचे यरमियाह नबी ने यरूशलम के तमाम बाशिंदों और यहूदाह की पूरी क़ौम से मुख़ातिब होकर कहा,

3“23 साल से रब का कलाम मुझ पर नाज़िल होता रहा है यानी यूसियाह बिन अमून की हुकूमत के तेरहवें साल से लेकर आज तक। बार बार मैं तुम्हें पैग़ामात सुनाता रहा हूँ, लेकिन तुमने ध्यान नहीं दिया।

4मेरे अलावा रब दीगर तमाम नबियों को भी बार बार तुम्हारे पास भेजता रहा, लेकिन तुमने न सुना, न तवज्जुह दी,

5गो मेरे ख़ादिम तुम्हें बार बार आगाह करते रहे, ‘तौबा करो! हर एक अपनी ग़लत राहों और बुरी हरकतों से बाज़ आकर वापस आए। फिर तुम हमेशा तक उस मुल्क में रहोगे जो रब ने तुम्हें और तुम्हारे बापदादा को अता किया था।

6अजनबी माबूदों की पैरवी करके उनकी ख़िदमत और पूजा मत करना! अपने हाथों के बनाए हुए बुतों से मुझे तैश न दिलाना, वरना मैं तुम्हें नुक़सान पहुँचाऊँगा’।”

7रब फ़रमाता है, “अफ़सोस! तुमने मेरी न सुनी बल्कि मुझे अपने हाथों के बनाए हुए बुतों से ग़ुस्सा दिलाकर अपने आपको नुक़सान पहुँचाया।”

8रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “चूँकि तुमने मेरे पैग़ामात पर ध्यान न दिया,

9इसलिए मैं शिमाल की तमाम क़ौमों और अपने ख़ादिम बाबल के बादशाह नबूकदनज़्ज़र को बुला लूँगा ताकि वह इस मुल्क, इसके बाशिंदों और गिर्दो-नवाह के ममालिक पर हमला करें। तब यह सफ़हाए-हस्ती से यों मिट जाएंगे कि लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे और वह उनका मज़ाक़ उड़ाएँगे। यह इलाक़े दायमी खंडरात बन जाएंगे।

10मैं उनके दरमियान ख़ुशीओ-शादमानी और दूल्हे दुलहन की आवाज़ें बंद कर दूँगा। चक्कियाँ ख़ामोश पड़ जाएँगी और चराग़ बुझ जाएंगे।

11पूरा मुल्क वीरानो-सुनसान हो जाएगा, चारों तरफ़ मलबे के ढेर नज़र आएँगे। तब तुम और इर्दगिर्द की क़ौमें 70 साल तक शाहे-बाबल की ख़िदमत करोगे।

12लेकिन 70 साल के बाद मैं शाहे-बाबल और उस की क़ौम को मुनासिब सज़ा दूँगा। मैं मुल्के-बाबल को यों बरबाद करूँगा कि वह हमेशा तक वीरानो-सुनसान रहेगा।

13उस वक़्त मैं उस मुल्क पर सब कुछ नाज़िल करूँगा जो मैंने उसके बारे में फ़रमाया है, सब कुछ पूरा हो जाएगा जो इस किताब में दर्ज है और जिसकी पेशगोई यरमियाह ने तमाम अक़वाम के बारे में की है।

14उस वक़्त उन्हें भी मुतअद्दिद क़ौमों और बड़े बड़े बादशाहों की ख़िदमत करनी पड़ेगी। यों मैं उन्हें उनकी हरकतों और आमाल का मुनासिब अज्र दूँगा।”

15रब जो इसराईल का ख़ुदा है मुझसे हमकलाम हुआ, “देख, मेरे हाथ में मेरे ग़ज़ब से भरा हुआ प्याला है। इसे लेकर उन तमाम क़ौमों को पिला दे जिनके पास मैं तुझे भेजता हूँ।

16जो भी क़ौम यह पिए वह मेरी तलवार के आगे डगमगाती हुई दीवाना हो जाएगी।”

17चुनाँचे मैंने रब के हाथ से प्याला लेकर उसे उन तमाम अक़वाम को पिला दिया जिनके पास रब ने मुझे भेजा।

18पहले यरूशलम और यहूदाह के शहरों को उनके बादशाहों और बुज़ुर्गों समेत ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। तब मुल्क मलबे का ढेर बन गया जिसे देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। आज तक वह मज़ाक़ और लानत का निशाना है।

19फिर यके बाद दीगरे मुतअद्दिद क़ौमों को ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। ज़ैल में उनकी फ़हरिस्त है : मिसर का बादशाह फ़िरौन, उसके दरबारी, अफ़सर, पूरी मिसरी क़ौम

20और मुल्क में बसनेवाले ग़ैरमुल्की, मुल्के-ऊज़ के तमाम बादशाह, फ़िलिस्ती बादशाह और उनके शहर अस्क़लून, ग़ज़्ज़ा और अक़रून, नीज़ फ़िलिस्ती शहर अशदूद का बचा-खुचा हिस्सा,

21अदोम, मोआब और अम्मोन,

22सूर और सैदा के तमाम बादशाह, बहीराए-रूम के साहिली इलाक़े,

23ददान, तैमा और बूज़ के शहर, वह क़ौमें जो रेगिस्तान के किनारे किनारे रहती हैं,

24मुल्के-अरब के तमाम बादशाह, रेगिस्तान में मिलकर बसनेवाले ग़ैरमुल्कियों के बादशाह,

25ज़िमरी, ऐलाम और मादी के तमाम बादशाह,

26शिमाल के दूरो-नज़दीक के तमाम बादशाह। यके बाद दीगरे दुनिया के तमाम ममालिक को ग़ज़ब का प्याला पीना पड़ा। आख़िर में शेशक के बादशाह को भी यह प्याला पीना पड़ा।

27फिर रब ने कहा, “उन्हें बता, ‘रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि ग़ज़ब का प्याला ख़ूब पियो! इतना पियो कि नशे में आकर क़ै आने लगे। उस वक़्त तक पीते जाओ जब तक तुम मेरी तलवार के आगे गिरकर पड़े न रहो।’

28अगर वह तेरे हाथ से प्याला न लें बल्कि उसे पीने से इनकार करें तो उन्हें बता, ‘रब्बुल-अफ़वाज ख़ुद फ़रमाता है कि पियो!

29देखो, जिस शहर पर मेरे नाम का ठप्पा लगा है उसी पर मैं आफ़त लाने लगा हूँ। अगर मैंने उसी से शुरू किया तो फिर तुम किस तरह बचे रहोगे? यक़ीनन तुम्हें सज़ा मिलेगी, क्योंकि मैंने तय कर लिया है कि दुनिया के तमाम बाशिंदे तलवार की ज़द में आ जाएँ’।” यह रब्बुल-अफ़वाज का फ़रमान है।

30“ऐ यरमियाह, उन्हें यह तमाम पेशगोइयाँ सुनाकर बता कि रब बुलंदियों से दहाड़ेगा। उस की मुक़द्दस सुकूनतगाह से उस की कड़कती आवाज़ निकलेगी, वह ज़ोर से अपनी चरागाह के ख़िलाफ़ गरजेगा। जिस तरह अंगूर का रस निकालनेवाले अंगूर को रौंदते वक़्त ज़ोर से नारे लगाते हैं उसी तरह वह नारे लगाएगा, अलबत्ता जंग के नारे। क्योंकि वह दुनिया के तमाम बाशिंदों के ख़िलाफ़ जंग के नारे लगाएगा।

31उसका शोर दुनिया की इंतहा तक गूँजेगा, क्योंकि रब अदालत में अक़वाम से मुक़दमा लड़ेगा, वह तमाम इनसानों का इनसाफ़ करके शरीरों को तलवार के हवाले कर देगा।” यह रब का फ़रमान है।

32रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “देखो, यके बाद दीगरे तमाम क़ौमों पर आफ़त नाज़िल हो रही है, ज़मीन की इंतहा से ज़बरदस्त तूफ़ान आ रहा है।

33उस वक़्त रब के मारे हुए लोगों की लाशें दुनिया के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पड़ी रहेंगी। न कोई उन पर मातम करेगा, न उन्हें उठाकर दफ़न करेगा। वह खेत में बिखरे गोबर की तरह ज़मीन पर पड़ी रहेंगी।

34ऐ गल्लाबानो, वावैला करो! ऐ रेवड़ के राहनुमाओ, राख में लोट-पोट हो जाओ! क्योंकि वक़्त आ गया है कि तुम्हें ज़बह किया जाए। तुम गिरकर नाज़ुक बरतन की तरह पाश पाश हो जाओगे।

35गल्लाबान कहीं भी भागकर पनाह नहीं ले सकेंगे, रेवड़ के राहनुमा बच ही नहीं सकेंगे।

36सुनो! गल्लाबानों की चीख़ें और रेवड़ के राहनुमाओं की आहें! क्योंकि रब उनकी चरागाह को तबाह कर रहा है।

37पुरसुकून मर्ग़ज़ारों का सत्यानास होगा जब रब का सख़्त ग़ज़ब नाज़िल होगा,

38जब रब जवान शेरबबर की तरह अपनी छुपने की जगह से निकलकर लोगों पर टूट पड़ेगा। तब ज़ालिम की तेज़ तलवार और रब का शदीद क़हर उनका मुल्क तबाह करेगा।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath