عیسائیت
واپس

यरमियाह 24

1एक दिन रब ने मुझे रोया दिखाई। उस वक़्त बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन बिन यहूयक़ीम को यहूदाह के बुज़ुर्गों, कारीगरों और लोहारों समेत बाबल में जिलावतन कर चुका था। रोया में मैंने देखा कि अंजीरों से भरी दो टोकरियाँ रब के घर के सामने पड़ी हैं।

2एक टोकरी में मौसम के शुरू में पकनेवाले बेहतरीन अंजीर थे जबकि दूसरी में ख़राब अंजीर थे जो खाए भी नहीं जा सकते थे।

3रब ने मुझसे सवाल किया, “ऐ यरमियाह, तुझे क्या नज़र आता है?” मैंने जवाब दिया, “मुझे अंजीर नज़र आते हैं। कुछ बेहतरीन हैं जबकि दूसरे इतने ख़राब हैं कि उन्हें खाया भी नहीं जा सकता।”

4तब रब मुझसे हमकलाम हुआ,

5“रब इसराईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि अच्छे अंजीर यहूदाह के वह लोग हैं जिन्हें मैंने जिलावतन करके मुल्के-बाबल में भेजा है। उन्हें मैं मेहरबानी की निगाह से देखता हूँ।

6क्योंकि उन पर मैं अपने करम का इज़हार करके उन्हें इस मुल्क में वापस लाऊँगा। मैं उन्हें गिराऊँगा नहीं बल्कि तामीर करूँगा, उन्हें जड़ से उखाड़ूँगा नहीं बल्कि पनीरी की तरह लगाऊँगा।

7मैं उन्हें समझदार दिल अता करूँगा ताकि वह मुझे जान लें, वह पहचान लें कि मैं रब हूँ। तब वह मेरी क़ौम होंगे और मैं उनका ख़ुदा हूँगा, क्योंकि वह पूरे दिल से मेरे पास वापस आएँगे।

8लेकिन बाक़ी लोग उन ख़राब अंजीरों की मानिंद हैं जो खाए नहीं जाते। उनके साथ मैं वह सुलूक करूँगा जो ख़राब अंजीरों के साथ किया जाता है। उनमें यहूदाह का बादशाह सिदक़ियाह, उसके अफ़सर, यरूशलम और यहूदाह में बचे हुए लोग और मिसर में पनाह लेनेवाले सब शामिल हैं।

9मैं होने दूँगा कि वह दुनिया के तमाम ममालिक के लिए दहशत और आफ़त की अलामत बन जाएंगे। जहाँ भी मैं उन्हें मुंतशिर करूँगा वहाँ वह इबरतअंगेज़ मिसाल बन जाएंगे। हर जगह लोग उनकी बेइज़्ज़ती, उन्हें लान-तान और उन पर लानत करेंगे।

10जब तक वह उस मुल्क में से मिट न जाएँ जो मैंने उनके बापदादा को दे दिया था उस वक़्त तक मैं उनके दरमियान तलवार, काल और मोहलक बीमारियाँ भेजता रहूँगा।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath