عیسائیت
واپس

यरमियाह 16

1रब मुझसे हमकलाम हुआ,

2“इस मक़ाम में न तेरी शादी हो, न तेरे बेटे-बेटियाँ पैदा हो जाएँ।”

3क्योंकि रब यहाँ पैदा होनेवाले बेटे-बेटियों और उनके माँ-बाप के बारे में फ़रमाता है,

4“वह मोहलक बीमारियों से मरकर खेतों में गोबर की तरह पड़े रहेंगे। न कोई उन पर मातम करेगा, न उन्हें दफ़नाएगा, क्योंकि वह तलवार और काल से हलाक हो जाएंगे, और उनकी लाशें परिंदों और दरिंदों की ख़ुराक बन जाएँगी।”

5रब फ़रमाता है, “ऐसे घर में मत जाना जिसमें कोई फ़ौत हो गया है। उसमें न मातम करने के लिए, न अफ़सोस करने के लिए दाख़िल होना। क्योंकि अब से मैं इस क़ौम पर अपनी सलामती, मेहरबानी और रहम का इज़हार नहीं करूँगा।” यह रब का फ़रमान है।

6“इस मुल्क के बाशिंदे मर जाएंगे, ख़ाह बड़े हों या छोटे। और न कोई उन्हें दफ़नाएगा, न मातम करेगा। कोई नहीं होगा जो ग़म के मारे अपनी जिल्द को काटे या अपने सर को मुँडवाए।

7किसी का बाप या माँ भी इंतक़ाल कर जाए तो भी लोग मातम करनेवाले घर में नहीं जाएंगे, न तसल्ली देने के लिए जनाज़े के खाने-पीने में शरीक होंगे।

8ऐसे घर में भी दाख़िल न होना जहाँ लोग ज़ियाफ़त कर रहे हैं। उनके साथ खाने-पीने के लिए मत बैठना।”

9क्योंकि रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, “तुम्हारे जीते-जी, हाँ तुम्हारे देखते देखते मैं यहाँ ख़ुशीओ-शादमानी की आवाज़ें बंद कर दूँगा। अब से दूल्हा दुलहन की आवाज़ें ख़ामोश हो जाएँगी।

10जब तू इस क़ौम को यह सब कुछ बताएगा तो लोग पूछेंगे, ‘रब इतनी बड़ी आफ़त हम पर लाने पर क्यों तुला हुआ है? हमसे क्या जुर्म हुआ है? हमने रब अपने ख़ुदा का क्या गुनाह किया है?’

11उन्हें जवाब दे, ‘वजह यह है कि तुम्हारे बापदादा ने मुझे तर्क कर दिया। वह मेरी शरीअत के ताबे न रहे बल्कि मुझे छोड़कर अजनबी माबूदों के पीछे लग गए और उन्हीं की ख़िदमत और पूजा करने लगे।

12लेकिन तुम अपने बापदादा की निसबत कहीं ज़्यादा ग़लत काम करते हो। देखो, मेरी कोई नहीं सुनता बल्कि हर एक अपने शरीर दिल की ज़िद के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारता है।

13इसलिए मैं तुम्हें इस मुल्क से निकालकर एक ऐसे मुल्क में फेंक दूँगा जिससे न तुम और न तुम्हारे बापदादा वाक़िफ़ थे। वहाँ तुम दिन-रात अजनबी माबूदों की ख़िदमत करोगे, क्योंकि उस वक़्त मैं तुम पर रहम नहीं करूँगा’।”

14लेकिन रब यह भी फ़रमाता है, “ऐसा वक़्त आनेवाला है कि लोग क़सम खाते वक़्त नहीं कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इसराईलियों को मिसर से निकाल लाया।’

15इसके बजाए वह कहेंगे, ‘रब की हयात की क़सम जो इसराईलियों को शिमाली मुल्क और उन दीगर ममालिक से निकाल लाया जिनमें उसने उन्हें मुंतशिर कर दिया था।’ क्योंकि मैं उन्हें उस मुल्क में वापस लाऊँगा जो मैंने उनके बापदादा को दिया था।”

16लेकिन मौजूदा हाल के बारे में रब फ़रमाता है, “मैं बहुत-से माहीगीर भेज दूँगा जो जाल डालकर उन्हें पकड़ेंगे। इसके बाद मैं मुतअद्दिद शिकारी भेज दूँगा जो उनका ताक़्क़ुब करके उन्हें हर जगह पकड़ेंगे, ख़ाह वह किसी पहाड़ या टीले पर छुप गए हों, ख़ाह चट्टानों की किसी दराड़ में।

17क्योंकि उनकी तमाम हरकतें मुझे नज़र आती हैं। मेरे सामने वह छुप नहीं सकते, और उनका क़ुसूर मेरे सामने पोशीदा नहीं है।

18अब मैं उन्हें उनके गुनाहों की दुगनी सज़ा दूँगा, क्योंकि उन्होंने अपने मुरदार बुतों और घिनौनी चीज़ों से मेरी मौरूसी ज़मीन को भरकर मेरे मुल्क की बेहुरमती की है।”

19ऐ रब, तू मेरी क़ुव्वत और मेरा क़िला है, मुसीबत के दिन मैं तुझमें पनाह लेता हूँ। दुनिया की इंतहा से अक़वाम तेरे पास आकर कहेंगी, “हमारे बापदादा को मीरास में झूट ही मिला, ऐसे बेकार बुत जो उनकी मदद न कर सके।

20इनसान किस तरह अपने लिए ख़ुदा बना सकता है? उसके बुत तो ख़ुदा नहीं हैं।”

21रब फ़रमाता है, “चुनाँचे इस बार मैं उन्हें सहीह पहचान अता करूँगा। वह मेरी क़ुव्वत और ताक़त को पहचान लेंगे, और वह जान लेंगे कि मेरा नाम रब है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath