عیسائیت
واپس

क़ुज़ात 17

1इफ़राईम के पहाड़ी इलाक़े में एक आदमी रहता था जिसका नाम मीकाह था।

2एक दिन उसने अपनी माँ से बात की, “आपके चाँदी के 1,100 सिक्के चोरी हो गए थे, ना? उस वक़्त आपने मेरे सामने ही चोर पर लानत भेजी थी। अब देखें, वह पैसे मेरे पास हैं। मैं ही चोर हूँ।” यह सुनकर माँ ने जवाब दिया, “मेरे बेटे, रब तुझे बरकत दे!”

3मीकाह ने उसे तमाम पैसे वापस कर दिए, और माँ ने एलान किया, “अब से यह चाँदी रब के लिए मख़सूस हो! मैं आपके लिए तराशा और ढाला हुआ बुत बनवाकर चाँदी आपको वापस कर देती हूँ।”

4चुनाँचे जब बेटे ने पैसे वापस कर दिए तो माँ ने उसके 200 सिक्के सुनार के पास ले जाकर लकड़ी का तराशा और ढाला हुआ बुत बनवाया। मीकाह ने यह बुत अपने घर में खड़ा किया,

5क्योंकि उसका अपना मक़दिस था। उसने मज़ीद बुत और एक अफ़ोद भी बनवाया और फिर एक बेटे को अपना इमाम बना लिया।

6उस ज़माने में इसराईल का कोई बादशाह नहीं था बल्कि हर कोई वही कुछ करता जो उसे दुरुस्त लगता था।

7उन दिनों में लावी के क़बीले का एक जवान आदमी यहूदाह के क़बीले के शहर बैत-लहम में आबाद था।

8अब वह शहर को छोड़कर रिहाइश की कोई और जगह तलाश करने लगा। इफ़राईम के पहाड़ी इलाक़े में से सफ़र करते करते वह मीकाह के घर पहुँच गया।

9मीकाह ने पूछा, “आप कहाँ से आए हैं?” जवान ने जवाब दिया, “मैं लावी हूँ। मैं यहूदाह के शहर बैत-लहम का रहनेवाला हूँ लेकिन रिहाइश की किसी और जगह की तलाश में हूँ।”

10मीकाह बोला, “यहाँ मेरे पास अपना घर बनाकर मेरे बाप और इमाम बनें। तब आपको साल में चाँदी के दस सिक्के और ज़रूरत के मुताबिक़ कपड़े और ख़ुराक मिलेगी।”

11लावी मुत्तफ़िक़ हुआ। वह वहाँ आबाद हुआ, और मीकाह ने उसके साथ बेटों का-सा सुलूक किया।

12उसने उसे इमाम मुक़र्रर करके सोचा,

13“अब रब मुझ पर मेहरबानी करेगा, क्योंकि लावी मेरा इमाम बन गया है।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath