عیسائیت
واپس

यसायाह 33

1तुझ पर अफ़सोस, जो दूसरों को बरबाद करने के बावुजूद बरबाद नहीं हुआ। तुझ पर अफ़सोस, जो दूसरों से बेवफ़ा था, हालाँकि तेरे साथ बेवफ़ाई नहीं हुई। लेकिन तेरी बारी भी आएगी। बरबादी का काम तकमील तक पहुँचाने पर तू ख़ुद बरबाद हो जाएगा। बेवफ़ाई का काम तकमील तक पहुँचाने पर तेरे साथ भी बेवफ़ाई की जाएगी।

2ऐ रब, हम पर मेहरबानी कर! हम तुझसे उम्मीद रखते हैं। हर सुबह हमारी ताक़त बन, मुसीबत के वक़्त हमारी रिहाई का बाइस हो।

3तेरी गरजती आवाज़ सुनकर क़ौमें भाग जाती हैं, तेरे उठ खड़े होने पर वह चारों तरफ़ बिखर जाती हैं।

4ऐ क़ौमो, जो माल तुमने लूट लिया वह दूसरे छीन लेंगे। जिस तरह टिड्डियों के ग़ोल फ़सलों पर झपटकर सब कुछ चट कर जाते हैं उसी तरह दूसरे तुम्हारी पूरी मिलकियत पर टूट पड़ेंगे।

5रब सरफ़राज़ है और बुलंदियों पर सुकूनत करता है। वही सिय्यून को इनसाफ़ और सदाक़त से मालामाल करेगा।

6उन दिनों में वह तेरी हिफ़ाज़त की ज़मानत होगा। तुझे नजात, हिकमत और दानाई का ज़ख़ीरा हासिल होगा, और रब का ख़ौफ़ तेरा ख़ज़ाना होगा।

7सुनो, उनके सूरमे गलियों में चीख़ रहे हैं, अमन के सफ़ीर तलख़ आहें भर रहे हैं।

8सड़कें वीरानो-सुनसान हैं, और मुसाफ़िर उन पर नज़र ही नहीं आते। मुआहदे को तोड़ा गया है, लोगों ने उसके गवाहों को रद्द करके इनसान को हक़ीर जाना है।

9ज़मीन ख़ुश्क होकर मुरझा गई है, लुबनान कुमलाकर शरमिंदा हो गया है। शारून का मैदान बेशजर बयाबान-सा बन गया है, बसन और करमिल अपने पत्ते झाड़ रहे हैं।

10लेकिन रब फ़रमाता है, “अब मैं उठ खड़ा हूँगा, अब मैं सरफ़राज़ होकर अपनी क़ुव्वत का इज़हार करूँगा।

11तुम उम्मीद से हो, लेकिन पेट में सूखी घास ही है, और जन्म देते वक़्त भूसा ही पैदा होगा। जब तुम फूँक मारोगे तो तुम्हारा दम आग बनकर तुम्हीं को राख कर देगा।

12अक़वाम यों भस्म हो जाएँगी कि चूना ही रह जाएगा, वह ख़ारदार झाड़ियों की तरह कटकर जल जाएँगी।

13ऐ दूर-दराज़ इलाक़ों के बाशिंदो, वह कुछ सुनो जो मैंने किया है। ऐ क़रीब के बसनेवालो, मेरी क़ुदरत जान लो।”

14सिय्यून में गुनाहगार घबरा गए हैं, बेदीन परेशानी के आलम में थरथराते हुए चिल्ला रहे हैं, “हममें से कौन भस्म करनेवाली इस आग के सामने ज़िंदा रह सकता है? हममें से कौन हमेशा तक भड़कनेवाली इस अंगीठी के क़रीब क़ायम रह सकता है?”

15लेकिन वह शख़्स क़ायम रहेगा जो रास्त ज़िंदगी गुज़ारे और सच्चाई बोले, जो ग़ैरक़ानूनी नफ़ा और रिश्वत लेने से इनकार करे, जो क़ातिलाना साज़िशों और ग़लत काम से गुरेज़ करे।

16वही बुलंदियों पर बसेगा और पहाड़ के क़िले में महफ़ूज़ रहेगा। उसे रोटी मिलती रहेगी, और पानी की कभी कमी न होगी।

17तेरी आँखें बादशाह और उस की पूरी ख़ूबसूरती का मुशाहदा करेंगी, वह एक वसी और दूर दूर तक फैला हुआ मुल्क देखेंगी।

18तब तू गुज़रे हुए हौलनाक वक़्त पर ग़ौरो-ख़ौज़ करके पूछेगा, “दुश्मन के बड़े अफ़सर किधर हैं? टैक्स लेनेवाला कहाँ ग़ायब हुआ? वह अफ़सर किधर है जो बुर्जों का हिसाब-किताब करता था?”

19आइंदा तुझे यह गुस्ताख़ क़ौम नज़र नहीं आएगी, यह लोग जो नाक़ाबिले-फ़हम ज़बान बोलते और हकलाते हुए ऐसी बातें करते हैं जो समझ में नहीं आतीं।

20हमारी ईदों के शहर सिय्यून पर नज़र डाल! तेरी आँखें यरूशलम को देखेंगी। उस वक़्त वह महफ़ूज़ सुकूनतगाह होगा, एक ख़ैमा जो आइंदा कभी नहीं हटेगा, जिसकी मेख़ें कभी नहीं निकलेंगी, और जिसका एक रस्सा भी नहीं टूटेगा।

21वहाँ रब ही हमारा ज़ोरावर आक़ा होगा, और शहर दरियाओं का मक़ाम होगा, ऐसी चौड़ी नदियों का मक़ाम जिन पर न चप्पूवाली कश्ती, न शानदार जहाज़ चलेगा।

22क्योंकि रब ही हमारा क़ाज़ी, रब ही हमारा सरदार और रब ही हमारा बादशाह है। वही हमें छुटकारा देगा।

23दुश्मन का बेड़ा ग़रक़ होनेवाला है। बादबान के रस्से ढीले हैं, और न वह मस्तूल को मज़बूत रखने, न बादबान को फैलाए रखने में मदद देते हैं। उस वक़्त कसरत का लूटा हुआ माल बटेगा, बल्कि इतना माल होगा कि लँगड़े भी लूटने में शिरकत करेंगे।

24सिय्यून का कोई भी फ़रद नहीं कहेगा, “मैं कमज़ोर हूँ,” क्योंकि उसके बाशिंदों के गुनाह बख़्शे गए होंगे।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath