यसायाह 28
1सामरिया पर अफ़सोस जो इसराईली शराबियों का शानदार ताज है। उस शहर पर अफ़सोस जो इसराईल की शानो-शौकत था लेकिन अब मुरझानेवाला फूल है। उस आबादी पर अफ़सोस जो नशे में धुत लोगों की ज़रख़ेज़ वादी के ऊपर तख़्तनशीन है।
2देखो, रब एक ज़बरदस्त सूरमा भेजेगा जो ओलों के तूफ़ान, तबाहकुन आँधी और सैलाब पैदा करनेवाली मूसलाधार बारिश की तरह सामरिया पर टूट पड़ेगा और ज़ोर से उसे ज़मीन पर पटख़ देगा।
3तब इसराईली शराबियों का शानदार ताज सामरिया पाँवों तले रौंदा जाएगा।
4तब यह मुरझानेवाला फूल जो ज़रख़ेज़ वादी के ऊपर तख़्तनशीन है और उस की शानो-शौकत ख़त्म हो जाएगी। उसका हाल फ़सल से पहले पकनेवाले अंजीर जैसा होगा। क्योंकि ज्योंही कोई उसे देखे वह उसे तोड़कर हड़प कर लेगा।
5उस दिन रब्बुल-अफ़वाज ख़ुद इसराईल का शानदार ताज होगा, वह अपनी क़ौम के बचे हुओं का जलाली सेहरा होगा।
6वह अदालत करनेवाले को इनसाफ़ की रूह दिलाएगा और शहर के दरवाज़े पर दुश्मन को पीछे धकेलनेवालों के लिए ताक़त का बाइस होगा।
7लेकिन यह लोग भी मै के असर से डगमगा रहे और शराब पी पीकर लड़खड़ा रहे हैं। इमाम और नबी नशे में झूम रहे हैं। मै पीने से उनके दिमाग़ों में ख़लल आ गया है, शराब पी पीकर वह चक्कर खा रहे हैं। रोया देखते वक़्त वह झूमते, फ़ैसले करते वक़्त झूलते हैं।
8तमाम मेज़ें उनकी क़ै से गंदी हैं, उनकी ग़िलाज़त हर तरफ़ नज़र आती है।
9वह आपस में कहते हैं, “यह शख़्स हमारे साथ इस क़िस्म की बातें क्यों करता है? हमें तालीम देते और इलाही पैग़ाम का मतलब सुनाते वक़्त वह हमें यों समझाता है गोया हम छोटे बच्चे हों जिनका दूध अभी अभी छुड़ाया गया हो।
10क्योंकि यह कहता है, ‘सव लासव सव लासव, क़व लाक़व क़व लाक़व, थोड़ा-सा इस तरफ़ थोड़ा-सा उस तरफ़’।”
11चुनाँचे अब अल्लाह हकलाते हुए होंटों और ग़ैरज़बानों की मारिफ़त इस क़ौम से बात करेगा।
12गो उसने उनसे फ़रमाया था, “यह आराम की जगह है। थकेमाँदों को आराम दो, क्योंकि यहीं वह सुकून पाएँगे।” लेकिन वह सुनने के लिए तैयार नहीं थे।
13इसलिए आइंदा रब उनसे इन्हीं अलफ़ाज़ से हमकलाम होगा, “सव लासव सव लासव, क़व लाक़व कव लाक़व, थोड़ा-सा इस तरफ़, थोड़ा-सा उस तरफ़।” क्योंकि लाज़िम है कि वह चलकर ठोकर खाएँ, और धड़ाम से अपनी पुश्त पर गिर जाएँ, कि वह ज़ख़मी हो जाएँ और फंदे में फँसकर गिरिफ़्तार हो जाएँ।
14चुनाँचे अब रब का कलाम सुन लो, ऐ मज़ाक़ उड़ानेवालो, जो यरूशलम में बसनेवाली इस क़ौम पर हुकूमत करते हो।
15तुम शेख़ी मारकर कहते हो, “हमने मौत से अहद बाँधा और पाताल से मुआहदा किया है। इसलिए जब सज़ा का सैलाब हम पर से गुज़रे तो हमें नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। क्योंकि हमने झूट में पनाह ली और धोके में छुप गए हैं।”
16इसके जवाब में रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, “देखो, मैं सिय्यून में एक पत्थर रख देता हूँ, कोने का एक आज़मूदा और क़ीमती पत्थर जो मज़बूत बुनियाद पर लगा है। जो ईमान लाएगा वह कभी नहीं हिलेगा।
17इनसाफ़ मेरा फ़ीता और रास्ती मेरी साहूल की डोरी होगी। इनसे मैं सब कुछ परखूँगा। ओले उस झूट का सफ़ाया करेंगे जिसमें तुमने पनाह ली है, और सैलाब तुम्हारी छुपने की जगह उड़ाकर अपने साथ बहा ले जाएगा।
18तब तुम्हारा मौत के साथ अहद मनसूख़ हो जाएगा, और तुम्हारा पाताल के साथ मुआहदा क़ायम नहीं रहेगा। सज़ा का सैलाब तुम पर से गुज़रकर तुम्हें पामाल करेगा।
19वह सुबह बसुबह और दिन-रात गुज़रेगा, और जब भी गुज़रेगा तो तुम्हें अपने साथ बहा ले जाएगा। उस वक़्त लोग दहशतज़दा होकर कलाम का मतलब समझेंगे।”
20चारपाई इतनी छोटी होगी कि तुम पाँव फैलाकर सो नहीं सकोगे। बिस्तर की चौड़ाई इतनी कम होगी कि तुम उसे लपेटकर आराम नहीं कर सकोगे।
21क्योंकि रब उठकर यों तुम पर झपट पड़ेगा जिस तरह पराज़ीम पहाड़ के पास फ़िलिस्तियों पर झपट पड़ा। जिस तरह वादीए-जिबऊन में अमोरियों पर टूट पड़ा उसी तरह वह तुम पर टूट पड़ेगा। और जो काम वह करेगा वह अजीब होगा, जो क़दम वह उठाएगा वह मामूल से हटकर होगा।
22चुनाँचे अपनी तानाज़नी से बाज़ आओ, वरना तुम्हारी ज़ंजीरें मज़ीद ज़ोर से कस दी जाएँगी। क्योंकि मुझे क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज से पैग़ाम मिला है कि तमाम दुनिया की तबाही मुतैयिन है।
23ग़ौर से मेरी बात सुनो! ध्यान से उस पर कान धरो जो मैं कह रहा हूँ!
24जब किसान खेत को बीज बोने के लिए तैयार करता है तो क्या वह पूरा दिन हल चलाता रहता है? क्या वह अपना पूरा वक़्त ज़मीन खोदने और ढेले तोड़ने में सर्फ़ करता है?
25हरगिज़ नहीं! जब पूरे खेत की सतह हमवार और तैयार है तो वह अपनी अपनी जगह पर स्याह ज़ीरा और सफ़ेद ज़ीरा, गंदुम, बाजरा और जो का बीज बोता है। आख़िर में वह किनारे पर चारे का बीज बोता है।
26किसान को ख़ूब मालूम है कि क्या क्या करना होता है, क्योंकि उसके ख़ुदा ने उसे तालीम देकर सहीह तरीक़ा सिखाया।
27चुनाँचे स्याह ज़ीरा और सफ़ेद ज़ीरा को अनाज की तरह गाहा नहीं जाता। दाने निकालने के लिए उन पर वज़नी चीज़ नहीं चलाई जाती बल्कि उन्हें डंडे से मारा जाता है।
28और क्या अनाज को गाह गाहकर पीसा जाता है? हरगिज़ नहीं! किसान उसे हद से ज़्यादा नहीं गाहता। गो उसके घोड़े कोई वज़नी चीज़ खींचते हुए बालियों पर से गुज़रते हैं ताकि दाने निकलें ताहम किसान ध्यान देता है कि दाने पिस न जाएँ।
29उसे यह इल्म भी रब्बुल-अफ़वाज से मिला है जो ज़बरदस्त मशवरों और कामिल हिकमत का मंबा है।
ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस
WEBREATH · 11:11
«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25
Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.
WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath