عیسائیت
واپس

होसेअ 8

1नरसिंगा बजाओ! दुश्मन उक़ाब की तरह रब के घर पर झपट्टा मारने को है। क्योंकि लोगों ने मेरे अहद को तोड़कर मेरी शरीअत की ख़िलाफ़वरज़ी की है।

2बेशक वह मदद के लिए चीख़ते-चिल्लाते हैं, ‘ऐ हमारे ख़ुदा, हम तो तुझे जानते हैं, हम तो इसराईल हैं।’

3लेकिन हक़ीक़त में इसराईल ने वह कुछ मुस्तरद कर दिया है जो अच्छा है। चुनाँचे दुश्मन उसका ताक़्क़ुब करे!

4उन्होंने मेरी मरज़ी पूछे बग़ैर अपने बादशाह मुक़र्रर किए, मेरी मंज़ूरी के बग़ैर अपने राहनुमाओं को चुन लिया है। अपने सोने-चाँदी से अपने लिए बुत बनाकर वह अपनी तबाही अपने सर पर लाए हैं।

5ऐ सामरिया, मैंने तेरे बछड़े को रद्द कर दिया है! मेरा ग़ज़ब तेरे बाशिंदों पर नाज़िल होनेवाला है, क्योंकि वह पाक-साफ़ हो जाने के क़ाबिल ही नहीं! यह हालत कब तक जारी रहेगी?

6ऐ इसराईल, जिस बछड़े की पूजा तू करता है उसे दस्तकार ही ने बनाया है। सामरिया का बछड़ा ख़ुदा नहीं है बल्कि पाश पाश हो जाएगा।

7वह हवा का बीज बो रहे हैं और आँधी की फ़सल काटेंगे। अनाज की फ़सल तैयार है, लेकिन बालियाँ कहीं नज़र नहीं आतीं। इससे आटा मिलने का इमकान ही नहीं। और अगर थोड़ा-बहुत गंदुम मिले भी तो ग़ैरमुल्की उसे हड़प कर लेंगे।

8हाँ, तमाम इसराईल को हड़प कर लिया गया है। अब वह क़ौमों में ऐसा बरतन बन गया है जो कोई पसंद नहीं करता।

9क्योंकि उसके लोग असूर के पास चले गए हैं। जंगली गधा तो अकेला रहता है, लेकिन इसराईल अपने आशिक़ को तोह्फ़े देकर ख़ुश रखने पर तुला रहता है।

10लेकिन ख़ाह वह दीगर क़ौमों में कितने तोह्फ़े क्यों न तक़सीम करें अब मैं उन्हें सज़ा देने के लिए जमा करूँगा। जल्द ही वह शहनशाह के बोझ तले पेचो-ताब खाने लगेंगे।

11गो इसराईल ने गुनाहों को दूर करने के लिए मुतअद्दिद क़ुरबानगाहें तामीर कीं, लेकिन वह उसके लिए गुनाह का बाइस बन गई हैं।

12ख़ाह मैं अपने अहकाम को इसराईलियों के लिए हज़ारों दफ़ा क्यों न क़लमबंद करता, तो भी फ़रक़ न पड़ता, वह समझते कि यह अहकाम अजनबी हैं, यह हम पर लागू नहीं होते।

13गो वह मुझे क़ुरबानियाँ पेश करके उनका गोश्त खाते हैं, लेकिन मैं, रब इनसे ख़ुश नहीं होता बल्कि उनके गुनाहों को याद करके उन्हें सज़ा दूँगा। तब उन्हें दुबारा मिसर जाना पड़ेगा।

14इसराईल ने अपने ख़ालिक़ को भूलकर बड़े महल बना लिए हैं, और यहूदाह ने मुतअद्दिद शहरों को क़िलाबंद बना लिया है। लेकिन मैं उनके शहरों पर आग नाज़िल करके उनके महलों को भस्म कर दूँगा।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath