عیسائیت
واپس

पैदाइश 11

1उस वक़्त तक पूरी दुनिया के लोग एक ही ज़बान बोलते थे।

2मशरिक़ की तरफ़ बढ़ते बढ़ते वह सिनार के एक मैदान में पहुँचकर वहाँ आबाद हुए।

3तब वह एक दूसरे से कहने लगे, “आओ, हम मिट्टी से ईंटें बनाकर उन्हें आग में ख़ूब पकाएँ।” उन्होंने तामीरी काम के लिए पत्थर की जगह ईंटें और मसाले की जगह तारकोल इस्तेमाल किया।

4फिर वह कहने लगे, “आओ, हम अपने लिए शहर बना लें जिसमें ऐसा बुर्ज हो जो आसमान तक पहुँच जाए फिर हमारा नाम क़ायम रहेगा और हम रूए-ज़मीन पर बिखर जाने से बच जाएंगे।”

5लेकिन रब उस शहर और बुर्ज को देखने के लिए उतर आया जिसे लोग बना रहे थे।

6रब ने कहा, “यह लोग एक ही क़ौम हैं और एक ही ज़बान बोलते हैं। और यह सिर्फ़ उसका आग़ाज़ है जो वह करना चाहते हैं। अब से जो भी वह मिलकर करना चाहेंगे उससे उन्हें रोका नहीं जा सकेगा।

7इसलिए आओ, हम दुनिया में उतरकर उनकी ज़बान को दरहम-बरहम कर दें ताकि वह एक दूसरे की बात समझ न पाएँ।”

8इस तरीक़े से रब ने उन्हें तमाम रूए-ज़मीन पर मुंतशिर कर दिया, और शहर की तामीर रुक गई।

9इसलिए शहर का नाम बाबल यानी अबतरी ठहरा, क्योंकि रब ने वहाँ तमाम लोगों की ज़बान को दरहम-बरहम करके उन्हें तमाम रूए-ज़मीन पर मुंतशिर कर दिया।

10यह सिम का नसबनामा है : सिम 100 साल का था जब उसका बेटा अरफ़क्सद पैदा हुआ। यह सैलाब के दो साल बाद हुआ।

11इसके बाद वह मज़ीद 500 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

12अरफ़क्सद 35 साल का था जब सिलह पैदा हुआ।

13इसके बाद वह मज़ीद 403 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

14सिलह 30 साल का था जब इबर पैदा हुआ।

15इसके बाद वह मज़ीद 403 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

16इबर 34 साल का था जब फ़लज पैदा हुआ।

17इसके बाद वह मज़ीद 430 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

18फ़लज 30 साल का था जब रऊ पैदा हुआ।

19इसके बाद वह मज़ीद 209 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

20रऊ 32 साल का था जब सरूज पैदा हुआ।

21इसके बाद वह मज़ीद 207 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

22सरूज 30 साल का था जब नहूर पैदा हुआ।

23इसके बाद वह मज़ीद 200 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

24नहूर 29 साल का था जब तारह पैदा हुआ।

25इसके बाद वह मज़ीद 119 साल ज़िंदा रहा। उसके और बेटे-बेटियाँ भी पैदा हुए।

26तारह 70 साल का था जब उसके बेटे अब्राम, नहूर और हारान पैदा हुए।

27यह तारह का नसबनामा है : अब्राम, नहूर और हारान तारह के बेटे थे। लूत हारान का बेटा था।

28अपने बाप तारह की ज़िंदगी में ही हारान कसदियों के ऊर में इंतक़ाल कर गया जहाँ वह पैदा भी हुआ था।

29बाक़ी दोनों बेटों की शादी हुई। अब्राम की बीवी का नाम सारय था और नहूर की बीवी का नाम मिलकाह। मिलकाह हारान की बेटी थी, और उस की एक बहन बनाम इस्का थी।

30सारय बाँझ थी, इसलिए उसके बच्चे नहीं थे।

31तारह कसदियों के ऊर से रवाना होकर मुल्के-कनान की तरफ़ सफ़र करने लगा। उसके साथ उसका बेटा अब्राम, उसका पोता लूत यानी हारान का बेटा और उस की बहू सारय थे। जब वह हारान पहुँचे तो वहाँ आबाद हो गए।

32तारह 205 साल का था जब उसने हारान में वफ़ात पाई।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath