عیسائیت
واپس

हिज़क़ियेल 25

1रब मुझसे हमकलाम हुआ,

2“ऐ आदमज़ाद, अम्मोनियों के मुल्क की तरफ़ रुख़ करके उनके ख़िलाफ़ नबुव्वत कर।

3उन्हें बता, ‘सुनो रब क़ादिरे-मुतलक़ का कलाम! वह फ़रमाता है कि ऐ अम्मोन बेटी, तूने ख़ुश होकर क़हक़हा लगाया जब मेरे मक़दिस की बेहुरमती हुई, मुल्के-इसराईल तबाह हुआ और यहूदाह के बाशिंदे जिलावतन हुए।

4इसलिए मैं तुझे मशरिक़ी क़बीलों के हवाले करूँगा जो अपने डेरे तुझमें लगाकर पूरी बस्तियाँ क़ायम करेंगे। वह तेरा ही फल खाएँगे, तेरा ही दूध पिएँगे।

5रब्बा शहर को मैं ऊँटों की चरागाह में बदल दूँगा और मुल्के-अम्मोन को भेड़-बकरियों की आरामगाह बना दूँगा। तब तुम जान लोगे कि मैं ही रब हूँ।

6क्योंकि रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि तूने तालियाँ बजा बजाकर और पाँव ज़मीन पर मार मारकर इसराईल के अंजाम पर अपनी दिली ख़ुशी का इज़हार किया। तेरी इसराईल के लिए हिक़ारत साफ़ तौर पर नज़र आई।

7इसलिए मैं अपना हाथ तेरे ख़िलाफ़ बढ़ाकर तुझे दीगर अक़वाम के हवाले कर दूँगा ताकि वह तुझे लूट लें। मैं तुझे यों मिटा दूँगा कि अक़वामो-ममालिक में तेरा नामो-निशान तक नहीं रहेगा। तब तू जान लेगी कि मैं ही रब हूँ’।”

8“रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मोआब और सईर इसराईल का मज़ाक़ उड़ाकर कहते हैं, ‘लो, देखो यहूदाह के घराने का हाल! अब वह भी बाक़ी क़ौमों की तरह बन गया है।’

9इसलिए मैं मोआब की पहाड़ी ढलानों को उनके शहरों से महरूम करूँगा। मुल्क के एक सिरे से दूसरे सिरे तक एक भी आबादी नहीं रहेगी। गो मोआबी अपने शहरों बैत-यसीमोत, बाल-मऊन और क़िरियतायम पर ख़ास फ़ख़र करते हैं, लेकिन वह भी ज़मीनबोस हो जाएंगे।

10अम्मोन की तरह मैं मोआब को भी मशरिक़ी क़बीलों के हवाले करूँगा। आख़िरकार अक़वाम में अम्मोनियों की याद तक नहीं रहेगी,

11और मोआब को भी मुझसे मुनासिब सज़ा मिलेगी। तब वह जान लेंगे कि मैं ही रब हूँ।”

12“रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि यहूदाह से इंतक़ाम लेने से अदोम ने संगीन गुनाह किया है।

13इसलिए मैं अपना हाथ अदोम के ख़िलाफ़ बढ़ाकर उसके इनसानो-हैवान को मार डालूँगा, और वह तलवार से मारे जाएंगे। तेमान से लेकर ददान तक यह मुल्क वीरानो-सुनसान हो जाएगा। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

14रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि अपनी क़ौम के हाथों मैं अदोम से बदला लूँगा, और इसराईल मेरे ग़ज़ब और क़हर के मुताबिक़ ही अदोम से निपट लेगा। तब वह मेरा इंतक़ाम जान लेंगे।”

15“रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि फ़िलिस्तियों ने बड़े ज़ुल्म के साथ यहूदाह से बदला लिया है। उन्होंने उस पर अपनी दिली हिक़ारत और दायमी दुश्मनी का इज़हार किया और इंतक़ाम लेकर उसे तबाह करने की कोशिश की।

16इसलिए रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मैं अपना हाथ फ़िलिस्तियों के ख़िलाफ़ बढ़ाने को हूँ। मैं इन करेतियों और साहिली इलाक़े के बचे हुओं को मिटा दूँगा।

17मैं अपना ग़ज़ब उन पर नाज़िल करके सख़्ती से उनसे बदला लूँगा। तब वह जान लेंगे कि मैं ही रब हूँ।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath